आकोला बिजली विभाग: मेंटेनेंस के नाम पर कटौती से ग्रामीणों में भारी आक्रोश
मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली कटौती और कर्मचारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीण परेशान। विभाग के प्रति आक्रोश और सुधार की मांग।

क्षेत्र में बिजली विभाग की घोर लापरवाही के चलते आम जनजीवन भारी संकट से जूझ रहा है। मेंटेनेंस के नाम पर विभाग द्वारा की जा रही अघोषित बिजली कटौती ने क्षेत्र को अंधेरे में धकेल दिया है, जबकि धरातल पर सुधार कार्य नदारद हैं। आलम यह है कि हल्की हवा चलते ही बिजली लाइनें फाल्ट हो जाती हैं और घंटों तक आपूर्ति बाधित रहती है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बिजली विभाग के मुख्य तार पेड़ों और वृक्षों की घनी टहनियों के बीच से गुजर रहे हैं, जिनकी छंटाई नहीं की जा रही है। नियमानुसार मेंटेनेंस के दौरान इन टहनियों को हटाया जाना अनिवार्य है, लेकिन कर्मचारी महज बिजली बंद कर खानापूर्ति करते हैं। परिणामस्वरूप, आपूर्ति बहाल होते ही तारों के टहनियों से टकराने से बार-बार ट्रिपिंग और फाल्ट की समस्या उत्पन्न हो रही है।
इस कुप्रबंधन की पराकाष्ठा यह है कि बिजली बंद होने के दौरान कर्मचारी निष्क्रिय रहते हैं, किंतु आपूर्ति शुरू होते ही फाल्ट आने पर उन्हें बिना किसी निश्चित योजना के इधर-उधर दौड़ते देखा जाता है। उपभोक्ताओं का आक्रोश इस बात पर चरम पर है कि शिकायत के लिए फोन करने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी फोन उठाने की जहमत नहीं उठाते। नाइट ड्यूटी के लिए नियुक्त कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित रहने के बजाय अपने घरों पर सोते पाए जाते हैं, जो पूछने पर दिन की ड्यूटी का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। इस विभागीय लापरवाही के चलते उमस भरी गर्मी में बच्चे और बुजुर्ग बेहाल हैं, और किसी अनहोनी की स्थिति में दफ्तर में कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं मिलता।
ग्रामीणों ने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए मांग की है कि आकोला में नियमित और सुचारू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा मेंटेनेंस के नाम पर हो रही खानापूर्ति तुरंत बंद कर पेड़ों की छंटाई की जाए। ग्रामीणों ने नाइट ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए पाबंद करने की मांग की है, ताकि आपात स्थिति में त्वरित समाधान हो सके। इसके अतिरिक्त, विभाग में पारदर्शिता के अभाव पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि कार्यालय में ड्यूटी रोस्टर चस्पा नहीं किया जाता और पूछने पर कर्मचारियों के नाम बताने से भी परहेज किया जाता है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो भविष्य में आंदोलन किया जाएगा।

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