तकनीकी कारणों से अटकी बायोमेट्रिक सत्यापन की समस्या को दूर कर अकोला प्रशासन ने 3 वर्षीय अंजलि खटीक को मौके पर ही पेंशन स्वीकृति पत्र सौंपा।

राज्य सरकार द्वारा आयोजित शहरी सेवा शिविर आमजन के लिए राहत का माध्यम बनते जा रहे हैं। अकोला में आयोजित शिविर के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के त्वरित समन्वय से 3 वर्षीय 70 प्रतिशत दिव्यांग बालिका अंजलि खटीक की लंबे समय से अटकी हुई पेंशन को चंद घंटों में स्वीकृत कर तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अकोला निवासी ललित खटीक, जो पेशे से मजदूर हैं, अपनी 3 वर्षीय पुत्री अंजलि खटीक को लेकर शहरी सेवा शिविर पहुंचे। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के शिविर काउंटर पर तैनात कार्मिक कमलेश खटीक को बताया कि उनकी पुत्री के सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण होने के बावजूद एक तकनीकी समस्या के कारण पेंशन शुरू नहीं हो पा रही थी। अंजलि 70 प्रतिशत दिव्यांग है, लेकिन कम उम्र होने के कारण उसके फिंगरप्रिंट और आईरिस आधार कार्ड में मैप नहीं हो पा रहे थे, जिससे बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया अटक गई थी।

मामले की गंभीरता और परिवार की स्थिति को देखते हुए विभागीय कार्मिक कमलेश खटीक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तकनीकी बाधा दूर करने के लिए सैंक्शन अथॉरिटी, एसडीओ कार्यालय और नगर पालिका अकोला के अधिकारियों से तुरंत संपर्क किया। सभी संबंधित विभागों के आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई के परिणामस्वरूप आवश्यक कानूनी और तकनीकी औपचारिकताएं शिविर स्थल पर ही पूरी कर ली गईं।

इसके बाद 29 जून 2026 को ही अंजलि खटीक की नवीन पेंशन को स्वीकृति प्रदान कर तत्काल प्रभाव से चालू कर दिया गया। शिविर के दौरान उपखंड अधिकारी महेश गगोरिया और नगर पालिका अकोला के अधिशासी अधिकारी कृष्ण गोपाल माली ने स्वयं अंजलि खटीक के पिता ललित खटीक को पेंशन स्वीकृति पत्र सौंपा।

शिविर में मौजूद अन्य नागरिकों ने भी प्रशासन की इस त्वरित कार्यवाही की सराहना की। यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण बनी कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, विभागीय समन्वय और समयबद्ध पहल के माध्यम से नियमों के दायरे में रहकर भी पात्र जरूरतमंदों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा सकती है।

Pratahkal Bureau

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