आकोला: राजकीय विद्यालय स्थित प्राचीन बावड़ी में गंदगी का अंबार, प्रशासन उदासीन
बालिका विद्यालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक बावड़ी रखरखाव के अभाव में डंपिंग यार्ड बनी, सफाई के बिना जाली लगाने पर उठे सवाल।

कांकरवा के आकोला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में कचरे से पटी ऐतिहासिक बावड़ी, जहां सफाई के अभाव में जल प्रदूषण और दुर्गंध की समस्या बढ़ रही है।
काकंरवा | 4 फरवरी: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आकोला तत्वावधान में बरसों पुरानी इतिहास बावड़ी जो कचरों का आलम बना हुआ है। पुराने लोगों का कहना है कि "सभी गांवों वाले यहाँ से पानी सप्लाई होती है।"
धार्मिक महत्व और वर्तमान स्थिति
इस प्राचीन बावडी में भगवान गणेश जी प्रतिमा व भगवान की मूर्ति बनी हुई है। यह स्थान पेयजल का मुख्य स्त्रोत रहा है। लेकिन कई सालों से इस बावड़ी के देखरेख के अभाव में स्थिति बदतर हो चुकी है:
- सीढियां निर्मित बावडी में खरपतवार और प्लास्टिक पडी़ है।
- लकडियाँ, कंकर-मिट्टी व गंदगी का अम्बार लगा हुआ है।
- पूरी बावड़ी बालिका विद्यालय परिसर में आती हैं।
प्रशासन की लापरवाही और दिखावा
जीर्णशिर्ण व गन्दगी का अम्बार लगा होने के बावजूद प्रशासन ने बावड़ी के लिए लाखों रूपये की जाली तो लगा दी, लेकिन बावड़ी की सफाई तक नहीं करवाई। पदाधिकारियों की देखरेख में जाली लगवा कर नाम रोशन करने में लगे हुए हैं।
बावड़ी की सफाई नही करवाकर जाली लगाना प्रशासन व पदाधिकारियों की लापरवाही जग जाहिर हो रही है।
आगामी संकट की चेतावनी
वर्तमान में बावड़ी में गंदगी पडी़ हुई है, वही बारिश का पानी भरने से गंदगी ऊपर तैरती नजर आ रही है। ये गंदगी चंद दिनों बाद बदबू देने लगेगी।

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