एनसीसी निदेशालय राजस्थान के उप महानिदेशक एयर कमोडोर संपत कुमार आनंद ने शुक्रवार को सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ का विधिवत दौरा कर भावी सैन्य अधिकारियों में ऊर्जा का संचार किया। एयर कमोडोर के विद्यालय आगमन पर कार्यवाहक प्राचार्य मेजर सी श्रीकुमार ने पारंपरिक सैन्य शिष्टाचार के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया, जिसके पश्चात विद्यालय के कैडेट्स द्वारा मुख्य अतिथि को भव्य 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि ने सर्वप्रथम विद्यालय परिसर स्थित 'स्मृतिका' पर पहुंचकर राष्ट्र की वेदी पर प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें नमन किया। यह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावुक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

जनसंपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलक्ष्य में स्कूल के शंकर मेनन सभागार में एक विशेष सभा आयोजित की गई, जिसमें कैडेट उमा शर्मा ने मुख्य अतिथि का परिचय प्रस्तुत किया। भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी एयर कमोडोर आनंद ने अपने उत्कृष्ट करियर और विशिष्ट उपलब्धियों से सेवा में एक महत्वपूर्ण स्थान अर्जित किया है। नेशनल डिफेंस एकेडमी के पूर्व छात्र रहे एयर कमोडोर ने 29 जून 1996 को वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच में फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। अपने गौरवशाली करियर में उन्होंने 20 से अधिक प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट, हेलीकॉप्टर और ट्रेनर विमानों में 2850 घंटे से अधिक उड़ान भरने का अनुभव प्राप्त किया है। सैन्य प्रशिक्षण और शिक्षा में सदैव अग्रणी रहे एयर कमोडोर आनंद मीरपुर, ढाका स्थित डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज तथा सिकंदराबाद के कॉलेज ऑफ एयर वॉरफेयर के स्नातक हैं, जहाँ उन्होंने उच्च स्तरीय ग्रेडिंग के साथ पाठ्यक्रम पूर्ण किए।

अपने सेवाकाल में उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड में फ्रंटलाइन कॉम्बैट स्क्वाड्रन की कमान संभालने सहित साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर और एयर फोर्स स्टेशन पोर्ट ब्लेयर में स्टेशन कमांडर के रूप में महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व निभाए। वर्ष 2011 में जगुआर विमानों पर ‘रेक्लाइट टैक्टिकल रिकॉनिसेंस सिस्टम’ को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए उन्हें ‘चीफ ऑफ एयर स्टाफ’ द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

सभागार में कैडेट्स को संबोधित करते हुए एयर कमोडोर आनंद ने कहा कि भारतीय वायु सेना न केवल एक सम्मानजनक करियर है, बल्कि देश सेवा का सर्वोच्च माध्यम भी है, जहाँ साहस, तकनीकी दक्षता और नेतृत्व का अद्वितीय संगम मिलता है। उन्होंने कैडेट्स को भविष्य के 'वायु योद्धा' बनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि वायु सेना में शामिल होना महज नौकरी नहीं बल्कि देश रक्षा का संकल्प है। उन्होंने जीवन में अनुशासन की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि आत्मविश्वास से कठिन राहें आसान हो जाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ लक्ष्य पर केंद्रित होकर कड़ी मेहनत करने और वर्तमान में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का सदुपयोग करने की सलाह दी। बातचीत के दौरान उन्होंने आत्म-अनुशासन, समय प्रबंधन, एकता और अनुशासन के गुणों को आत्मसात करने का आह्वान किया।

दौरे के दौरान उन्होंने विद्यालय के छात्रावासों, कैडेट्स मैस, आर्चरी रेंज, एयर राइफल शूटिंग रेंज, इंडोर स्टेडियम, शैक्षणिक भवन एवं प्रशासनिक भवन का गहन निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कार्यक्रम के अंत में स्कूल कैप्टेन कैडेट मधुसुदन सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया और कार्यवाहक प्राचार्य मेजर सी श्रीकुमार ने स्कूल परिवार की ओर से मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर इस गरिमामयी यात्रा को यादगार बनाया।

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