आलाखेड़ी में उमड़ा आस्था का सैलाब: संत सुदर्शनाचार्य के सानिध्य में गूँजा हिंदुत्व और राष्ट्र चेतना का शंखनाद
डूंगला के कृष्ण नगर आलाखेड़ी में संत स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज के सानिध्य में भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ। विभाग कार्यवाहक दिनेश कुमार भट्ट ने हिंदू एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। अम्बालाल मेनारिया, दुर्गेश वैष्णव और गोपाल शर्मा कटेरा की उपस्थिति में हजारों लोगों ने धर्म व संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया।

डूंगला। चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला उपखण्ड स्थित कृष्ण नगर आलाखेड़ी गाँव में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन ने न केवल धर्म और संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का एक नया संकल्प भी प्रस्तुत किया। भक्ति, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के त्रिवेणी संगम से सराबोर इस आयोजन में समूचा क्षेत्र भगवामय नजर आया, जहाँ हज़ारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह ने अपनी जड़ों से जुड़े रहने का उद्घोष किया।
इस गरिमामय सम्मेलन को अनंत विभूषित संत स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। महाराज के आगमन से संपूर्ण वातावरण धर्म और संस्कारों की खुशबू से महक उठा। आयोजन के सूत्रधार और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष अम्बालाल मेनारिया आलाखेड़ी ने बताया कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और युवा पीढ़ी के भीतर सनातन मूल्यों का बीजारोपण करना था। सम्मेलन में मातृ शक्ति और पुरुष वर्ग की भारी उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि ग्रामीण अंचलों में धर्म और राष्ट्र के प्रति जागरूकता की लहर अत्यंत प्रबल है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, चित्तौड़गढ़ प्रांत के विभाग कार्यवाहक दिनेश कुमार भट्ट ने अपने ओजस्वी उद्बोधन से उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक समरसता पर विशेष बल देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में संस्कारों की भूमिका सर्वोपरि है। भट्ट ने स्पष्ट रूप से आह्वान किया कि आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सनातन परंपराओं को विस्मृत नहीं करना चाहिए, बल्कि नई पीढ़ी को इन गौरवशाली मूल्यों से जोड़ना आज की महती आवश्यकता है।
आयोजन के दौरान उपस्थित जनसमूह ने अपनी धर्म-संस्कृति की रक्षा और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन का सामूहिक संकल्प लिया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर दुर्गेश वैष्णव और गोपाल शर्मा कटेरा सहित कई गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और वैचारिक विमर्श में सक्रिय सहभागिता निभाई। यह सम्मेलन केवल एक आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को एकता के सूत्र में पिरोने और राष्ट्र चेतना को जागृत करने का एक सशक्त माध्यम बनकर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

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