चित्तौड़गढ़। महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में महिला प्रकोष्ठ एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के संयुक्त तत्वावधान में नशा मुक्ति और जेंडर संवेदनशीलता विषय पर व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. पूनम शैरी उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. हेमेंद्र नाथ व्यास ने बताया कि यह कार्यक्रम कॉलेज शिक्षा, जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेंडर संवेदनशीलता का मूल उद्देश्य लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक दृष्टिकोणों में सकारात्मक बदलाव लाना है।

मुख्य अतिथि प्रो. पूनम शैरी ने अपने संबोधन में कहा कि जेंडर आधारित भेदभाव और सामाजिक रूढ़िवादिता कई बार महिलाओं और युवाओं को तनाव और नशे की ओर धकेलती हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए नशा मुक्ति प्रयासों को जेंडर संवेदी बनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि हर वर्ग की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी और समावेशी उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार की बजट घोषणा ‘नई किरण नशा मुक्ति केंद्र’ के तहत महाविद्यालय के दस विद्यार्थियों का चयन नशा मुक्ति सखा-सखी के रूप में किया गया। इन विद्यार्थियों को विशेष किट के रूप में बैग, डायरी, पेन, टी-शर्ट और जैकेट प्रदान की गई। इस अवसर पर डॉ. भारती मेहता, बालकृष्ण लड्ढा, डॉ. कंचन वर्मा, डॉ. अनिता कुमारी, अपेक्षा नागोरी एवं भारती भावनानी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेमलता महावर ने किया जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. सुषमा लोट ने किया।

इस आयोजन ने विद्यार्थियों में न केवल नशा मुक्ति और जेंडर संवेदनशीलता के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया। कार्यक्रम का प्रभाव शैक्षणिक वातावरण और युवा वर्ग पर दीर्घकालिक सामाजिक संदेश देने वाला माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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