चित्तौड़गढ़। शौर्य, स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक भूमि मेवाड़ की धरा पर मंगलवार को राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव का भव्य और प्रेरणादायी शुभारंभ हुआ। स्वदेशी चेतना, भारतीय सांस्कृतिक गौरव और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आयोजित इस महोत्सव ने पूरे चित्तौड़गढ़ को स्वदेशी के रंग में रंग दिया। सुभाष चौक से इंदिरा गांधी स्टेडियम तक निकली रंग-बिरंगी भव्य शोभायात्रा ने नगरवासियों में उत्साह और राष्ट्रभावना का संचार कर दिया।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने स्वदेशी को आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बताते हुए कहा कि जब भारतीयों का स्वाभिमान जागृत होगा, तब स्वदेशी भावना स्वतः सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी के माध्यम से ही विदेशी वस्तुओं के सस्ते, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण विकल्प प्रस्तुत कर विदेशी कंपनियों के वर्चस्व को समाप्त किया जा सकता है। मेवाड़ की वीरभूमि से स्वदेशी महोत्सव का संदेश जाना राष्ट्र के लिए अत्यंत प्रेरक पहल है। इस अवसर पर राज्यपाल ने उपस्थित जनसमूह को स्वदेशी अपनाने का संकल्प भी दिलाया।

राज्यपाल बागडे ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय देश को गेहूं आयात करना पड़ता था, जबकि आज 140 करोड़ नागरिकों का पेट भरने के बाद भी भारत अनाज का निर्यात कर रहा है। यह स्वदेशी की शक्ति का स्पष्ट प्रमाण है। भारत का विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना भी स्वदेशी अवधारणा का परिणाम है। उन्होंने 1905 में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के 120 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी पूर्ण स्वदेशी न बन पाने पर आत्ममंथन की आवश्यकता जताई।

स्वागत उद्बोधन में स्थानीय सांसद चन्द्र प्रकाश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी के प्रति समर्पण की सशक्त अभिव्यक्ति चित्तौड़गढ़ में आयोजित यह राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव है। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के मंत्र के साथ भारत आज वैश्विक मंच पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने छह दिवसीय इस आयोजन को स्वदेशी भावना को समर्पित बताया।

उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पतंजलि पीठ हरिद्वार के संस्थापक आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वदेशी के बिना आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना अधूरी है। स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीयता, आत्मसम्मान और भारतीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने महात्मा गांधी और विनोबा भावे के विचारों का स्मरण करते हुए कहा कि स्वदेशी ही वह मार्ग है जो भारत को विदेशी शक्तियों के प्रभाव से मुक्त कर सकता है। स्वदेशी को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर ही रोजगार सृजन, आर्थिक सशक्तिकरण और सशक्त राष्ट्र निर्माण संभव है।

महोत्सव के दौरान राज्यपाल बागडे ने गोल्फ कार्ट के माध्यम से मेले का अवलोकन किया और मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों की दुकानों और औद्योगिक इकाइयों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया। उद्घाटन समारोह में अतिथियों का स्वागत आकोला की दाबू प्रिंट से बने उपरणों से किया गया, जबकि स्मृति चिह्न के रूप में बस्सी की प्रसिद्ध काष्ठ कला से निर्मित कावड़ भेंट की गई। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार स्वदेशी उत्पादों की किट भी अतिथियों को प्रदान की गई।

राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव का आगाज भव्य शोभायात्रा से हुआ, जिसमें पारंपरिक वाद्ययंत्र, घोड़े, बैलगाड़ियां और ऊंटगाड़ियों पर सजी झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। श्री सांवलिया सेठ की झांकी ने विशेष रूप से श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। शोभायात्रा मार्ग में विभिन्न संस्थाओं द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। इसमें सांसद, विधायक, स्काउट-गाइड, खिलाड़ी, विद्यार्थी, लोक कलाकार, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता रही।

स्वदेशी के विचार, सांस्कृतिक चेतना और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ आयोजित यह राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव न केवल चित्तौड़गढ़ बल्कि पूरे देश के लिए स्वाभिमान और स्वदेशी जागरण का सशक्त संदेश बनकर उभरा है।

Pratahkal Bureau

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