चित्तौड़गढ़ के पायरी गांव में शिक्षा की नई अलख: राज्यपाल स्मार्ट विलेज पहल के तहत प्रौढ़ साक्षरता का शंखनाद
चित्तौड़गढ़ के पायरी गांव में 'राज्यपाल स्मार्ट विलेज' पहल के तहत कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। डॉ. आर.एल. सोलंकी और श्रीमती दीपा इन्दौरिया ने ग्रामीणों को शिक्षा का महत्व समझाते हुए साक्षर बनने हेतु प्रेरित किया। इस कार्यक्रम में 46 किसानों ने भाग लेकर विकास और शिक्षा की नई राह चुनी।

कांकरवा/चित्तौड़गढ़। राजस्थान के गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आदर्श बनाने के राज्यपाल के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बड़ीसादड़ी उपखंड क्षेत्र के पायरी गांव में शनिवार, 17 जनवरी 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, चित्तौड़गढ़ द्वारा 'राज्यपाल स्मार्ट विलेज' पहल के अंतर्गत एक भव्य प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन मात्र एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों के लिए सुनहरी उम्मीद बनकर उभरा जिन्होंने किन्हीं कारणों से बचपन में शिक्षा का अवसर गंवा दिया था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. आर.एल. सोलंकी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए इस दूरगामी योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राज्यपाल महोदय की मंशा प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा एक गांव गोद लेकर उसे 'स्मार्ट विलेज' के रूप में विकसित करने की है। डॉ. सोलंकी ने जोर देकर कहा कि इस पहल का मूल लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि केंद्र और राज्य सरकार की प्रत्येक जन-कल्याणकारी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हो और पायरी जैसा गांव एक आदर्श प्रतिमान के रूप में स्थापित हो सके। उन्होंने प्रौढ़ साक्षरता को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती और यह कार्यक्रम उन प्रौढ़ों के लिए एक नया द्वार खोलता है जो अब साक्षर बनकर समाज के विकास में भागीदारी करना चाहते हैं।
शिक्षा के सामाजिक और व्यावहारिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कार्यक्रम सहायक श्रीमती दीपा इन्दौरिया ने प्रतिभागियों में नया उत्साह जगाया। उन्होंने भावुक और प्रेरणादायी स्वर में ग्रामीणों को साक्षर बनने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मानव जीवन में शिक्षा की उपयोगिता अपरिहार्य है। उन्होंने आह्वान किया कि शिक्षित होकर ही ग्रामीण एक कल्याणकारी समाज की स्थापना में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। इसी क्रम में अरुणादेय संस्थान के महेश पंवार ने शिक्षा के संवैधानिक अधिकार की बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग औपचारिक शिक्षा की आयु पार कर चुके हैं, उनके लिए साक्षरता, आधारभूत शिक्षा, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग सदैव खुले हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान किसानों का विधिवत पंजीयन भी किया।
खेती और शिक्षा के समन्वय पर बल देते हुए केंद्र के कृषि पर्यवेक्षक हेमराज बंजारा ने कृषकों को आधुनिक दौर की मांग के अनुरूप जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस ज्ञानवर्धक चौपाल में गांव के प्रबुद्ध जनों और किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक लाल सिंह रावत एवं श्री लाल सिंह मीणा सहित कुल 46 किसानों की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजन के अंत में यह स्पष्ट संदेश गया कि पायरी गांव अब न केवल कृषि में आत्मनिर्भर होगा, बल्कि साक्षरता के प्रकाश से अपने भविष्य को भी उज्ज्वल करेगा। यह पहल ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी

Pratahkal Bureau
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