चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूंखण्ड स्थित अनोपपुरा मंडल आज उस समय राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के रंग में सराबोर हो उठा, जब क्षेत्र में प्रथम बार आयोजित ऐतिहासिक 'विराट हिंदू सम्मेलन' ने एकता की एक नई इबारत लिख दी। अनोपपुरा की पावन धरा पर आयोजित इस भव्य संगम में 11 गांवों की सहभागिता ने न केवल भक्ति का ज्वार पैदा किया, बल्कि सामाजिक समरसता और 'पंचपरिवर्तन' का ऐसा संदेश दिया जिसने पूरे क्षेत्र को एक सूत्र में पिरो दिया। सुबह की पहली किरण के साथ 500 महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने आयोजन की दिव्यता की घोषणा की, जहां मार्ग में ग्रामीण जनों द्वारा की गई पुष्पवर्षा ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।

सम्मेलन के मुख्य वक्ता, पर्यावरण सह प्रांत संयोजक धर्मपाल गोयल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में भारत के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत बिना किसी भेदभाव के संयुक्त परिवारों और अटूट सामाजिक समरसता का जीवंत उदाहरण था। मध्यकाल के संघर्षों और वीर योद्धाओं के बलिदान की चर्चा करते हुए उन्होंने परम पूजनीय डॉ. मोहनजी भागवत के आह्वान को दोहराया और हिंदू समाज को हर परिस्थिति में एकजुट रहने का मंत्र दिया। गोयल ने विशेष रूप से 'पंचपरिवर्तन' के पांच स्तंभों—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली और नागरिक कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इन्हें जीवन का आधार बनाने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में मातृशक्ति की प्रखर आवाज बनकर उभरीं दीदी अनीता जागेटिया ने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और चित्तौड़ की आन-बान-शान महारानी पद्मिनी के त्याग को याद करते हुए वर्तमान नारी शक्ति को 'सबला' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं को राष्ट्र एवं धर्म के प्रति अपने दायित्वों को समझने के लिए प्रेरित किया। इसी क्रम में, महंत श्री 1008 त्यागी महाराज ने अपने आशीर्वचनों से पांडाल में उपस्थित जनसमूह को कृतार्थ किया। पूज्य संत ने रामायण और गीता के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए पड़ोसी देशों में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की ओर ध्यान आकर्षित किया और आपसी प्रेम एवं अखंडता को ही सबसे बड़ा रक्षा कवच बताया।

इस विराट आयोजन में अनोपपुरा, चरछा पीपल्दा, जावदिया, जूना जावदिया, नया फतेहपुर, भीलखेड़ी, भचेड़ी आंबा, हरिपुरा और रांदौला सहित 11 गांवों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई महापुरुषों की भव्य प्रदर्शनी, वंदे मातरम् का उद्घोष और एक नन्ही बालिका द्वारा दी गई भारत माता की मनमोहक प्रस्तुति ने उपस्थित जनों में देशभक्ति का संचार कर दिया। सम्मेलन में बेगूं खण्ड के पालक गीतालाल, भारतीय किसान संघ के लाभचंद, सह जिला कार्यवाह खेमराज, खण्ड कार्यवाह सुनील और खण्ड कार्यवाह सिंगोली श्रीलाल सहित कई गणमान्य विभूतियां साक्षी बनीं।

कार्यक्रम का समापन अनोपपुरा की मातृशक्तियों के समर्पण और सामूहिक एकता के अनूठे उदाहरण के साथ हुआ। प्रत्येक घर के बाहर सजी रंगोलियां और स्वच्छ गलियां ग्रामीणों के उत्साह को बयां कर रही थीं। सम्मेलन के अध्यक्ष घीसालाल धाकड़ ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इस सफल आयोजन की पूर्णता की घोषणा की। आयोजन का सबसे भावुक और प्रभावी क्षण वह रहा जब 3000 से अधिक महिला, पुरुष और बच्चों ने एक साथ बैठकर महाप्रसादी ग्रहण की, जिसने ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर 'एक हिंदू-श्रेष्ठ हिंदू' की संकल्पना को चरितार्थ कर दिया।

Pratahkal Bureau

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