काकंरवा, 25 दिसंबर।

आकोला में चल रही नौ दिवसीय रामलीला के तहत मंगलवार रात्रि को सीता स्वयंवर का प्रसंग अत्यंत भव्य और भावनात्मक वातावरण में मंचित किया गया। श्री सीताराम रामायण मंडल नृसिंह द्वारा अखाड़ा आकोला में प्रस्तुत इस मंचन ने दर्शकों को धर्म, मर्यादा और शौर्य की कथा से बांधे रखा। देर रात तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सीता स्वयंवर के दृश्य में रावण और बाणासुर के बीच हुआ तीखा और तर्कपूर्ण संवाद विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। बाणासुर ने रावण के शास्त्र ज्ञान का गहन तर्कों के साथ खंडन किया, जिससे मंचन में बौद्धिक और नाटकीय गहराई आई। स्वयंवर में सीता के लिए योग्य वर न मिलने पर राजा जनक ने अपनी पीड़ा और चिंता व्यक्त की, जिसे कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय से जीवंत कर दिया।

गुरु विश्वामित्र के आदेश पर जैसे ही भगवान राम ने शिव धनुष को स्पर्श कर उसका खंडन किया, मंच के साथ-साथ पूरी दर्शक दीर्घा ‘जय श्री राम’ के जयघोष से गूंज उठी। इस दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। शिव धनुष टूटने की ध्वनि सुनते ही भगवान परशुराम क्रोधित अवस्था में मंच पर पहुंचे। उनके तेजस्वी और उग्र स्वरूप को देखकर उपस्थित जनसमूह स्तब्ध रह गया।

इसके पश्चात लक्ष्मण और भगवान परशुराम के बीच हुआ संवाद दर्शकों के लिए अत्यंत रोचक और प्रभावशाली रहा, जिसने रामकथा की गरिमा और मर्यादा को और अधिक उजागर किया। मंचन के समापन पर रामलीला के आयोजक सहित अन्य लोगों ने विधिवत आरती उतारी और धार्मिक आयोजन को पूर्णता प्रदान की।

आकोला में आयोजित यह रामलीला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी, बल्कि रामायण के आदर्शों और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुई।

Pratahkal Bureau

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