पार्श्वनाथ दीक्षा कल्याणक पर भक्ति और तप का विराट संगम, 130 से अधिक श्रद्धालुओं ने किया तेले तप
शंखेश्वर 108 श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ पर भगवान पार्श्वनाथ के दीक्षा कल्याणक महोत्सव में भक्ति और तप का अनुपम संगम देखने को मिला। साध्वी अर्हद रेखा श्रीजी की निश्रा में 130 से अधिक श्रद्धालुओं ने तेले तप किया और प्रवचन व धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना का विस्तार हुआ।

भूपालसागर, 16 दिसम्बर।
मेवाड़ की धर्मनगरी में स्थित सुप्रसिद्ध शंखेश्वर 108 श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ इन दिनों भक्ति, तप और श्रद्धा के अनुपम वातावरण से सराबोर है। तीर्थ पर चल रहे पंचदिवसीय धार्मिक प्रसंग के अंतर्गत मंगलवार को जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का दीक्षा कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह पावन आयोजन परम पूज्य साध्वीजी अर्हद रेखा श्रीजी आदि ठाणा-4 की मंगलमय निश्रा में आयोजित किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ प्रातःकाल संगीतकार मीत शाह द्वारा प्रस्तुत मधुर स्तवनों और भजनों से हुआ, जिसने समूचे तीर्थ परिसर को भक्तिरस से ओतप्रोत कर दिया। इसके पश्चात 108 पार्श्वनाथ भगवान सहित अन्य तीर्थंकरों की अष्ट प्रकारी पूजा विधिपूर्वक एवं गहन भक्तिभाव से संपन्न की गई। श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उनकी एकाग्र आराधना ने इस अवसर को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
दोपहर में आयोजित प्रवचन सभा में साध्वीजी अर्हद रेखा श्रीजी ने श्रावक-श्राविकाओं को संबोधित करते हुए तप, त्याग और आत्मसंयम को जैन धर्म की मूल पहचान बताया। उन्होंने कहा कि तपस्या न केवल आत्मशुद्धि का मार्ग है, बल्कि यह जीवन को संयम, करुणा और वैराग्य की दिशा में अग्रसर करती है। दीक्षा कल्याणक जैसे पुण्य पर्वों की आराधना से पुण्य का अपार संचित होता है, जो भव-भवांतर तक आत्मा के कल्याण का कारण बनता है।
इस पावन अवसर पर 130 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने तेले तप अर्थात लगातार तीन उपवास की कठोर एवं अनुकरणीय आराधना कर अपनी आस्था और संकल्प शक्ति का परिचय दिया। तपस्वियों के प्रति उपस्थित जनसमूह में विशेष सम्मान और प्रेरणा का भाव देखने को मिला।
दीक्षा कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में दोपहर बाद एक ज्ञानवर्धक और आकर्षक ‘कौन बनेगा प्रभु पार्श्व प्रेमी’ क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें तेले तप करने वाली श्राविकाओं के साथ स्थानीय मंडल की श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की, जिससे धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ आध्यात्मिक चेतना का भी विस्तार हुआ।
आयोजन समिति ने इस अवसर पर अधिकाधिक श्रद्धालुओं से शंखेश्वर 108 श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ की यात्रा कर धर्मलाभ अर्जित करने का आह्वान किया। पंचदिवसीय महोत्सव का समापन बुधवार प्रातः सभी आराधकों के सामूहिक पारणा महोत्सव के साथ होगा, जो इस आध्यात्मिक आयोजन को एक गरिमामय पूर्णता प्रदान करेगा।

Pratahkal Bureau
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