चित्तौड़गढ़। मेवाड़ की सरज़मीन से आस्था और रूहानियत का एक अनोखा कारवां सोमवार को मक्के–मदीने की ओर रवाना हुआ, जब सूफी संत सैय्यद सरदार अहमद अशरफी के नवासे और सज्जादानशीन मोहम्मद यूसुफ अशरफी की सरपरस्ती में 41 जायरीनों का काफिला उमराह यात्रा के लिए चित्तौड़गढ़ से निकला। शहरवासियों की दुआओं और भावपूर्ण विदाई के बीच यह यात्रा एक आध्यात्मिक सफ़र के रूप में शुरू हुई।

काफिले में मोहम्मद यूसुफ अशरफी के साथ सुल्ताना खानम, निसार फातमा अशरफी, यूसुफ छीपा, हबीबुर्रहमान, सोफिया, जुबेदा बेगम सहित 41 पुरुष और महिलाएं शामिल हैं, जो लगभग 20 दिनों तक पवित्र स्थलों की जियारत करेंगे। यात्रा के प्रथम चरण में जायरीन दस दिन मक्का शरीफ में बिताकर तवाफ और उमराह की अदायगी करेंगे। इसके बाद वे मदीना शरीफ पहुंचकर पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद के रोज़े की जियारत का सौभाग्य प्राप्त करेंगे। इस दौरान सऊदी अरब स्थित कई अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की भी जियारत की जाएगी।

जायरीनों को विदा करने के मौके पर मौलाना जुबैर अशरफी, मौलाना जुनेद अशरफी, मौलाना उमेर अशरफी, मुराद खान, मुबारिक हुसैन, जाकिर खान, फैय्याज खान, मोहसिन खान सहित बड़ी संख्या में मुरीद और समाजजन मौजूद रहे। दुआओं, सलाम और रूहानी माहौल के बीच रवाना हुआ यह काफिला शहर की आस्था, भाईचारे और रूहानी परंपरा की एक अनूठी मिसाल बन गया।

Pratahkal Bureau

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