श्रद्धा, परंपरा और एकता का संगम: चित्तौड़गढ़ में भव्य रूप से मनाई गई श्री श्रीयादें माता जयंती
चित्तौड़गढ़ में प्रजापत समाज की कुलदेवी श्री श्रीयादें माता की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। भव्य शोभायात्रा, महाआरती और सम्मान समारोह के माध्यम से धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का सशक्त संदेश दिया गया।

चित्तौड़गढ़ में प्रजापत समाज की कुलदेवी श्री श्रीयादें माता की जयंती इस वर्ष गहन श्रद्धा, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता के भाव के साथ अत्यंत भव्य रूप में मनाई गई। पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला, जहां परंपरा, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी।
जयंती के अवसर पर नगर में विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ पाडन पोल से विधिवत आरती के साथ हुआ। डीजे पर बज रही भक्तिमय धुनों के बीच महिलाएं और पुरुष श्रद्धा से सराबोर होकर नृत्य करते हुए आगे बढ़े। शोभायात्रा में श्रीयादें माताजी की सुसज्जित प्रतिमा को भव्य बग्गी में विराजमान किया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। महिलाओं ने पारंपरिक लाल चुनर धारण की, जबकि पुरुष सफेद परिधान में शामिल हुए, जिससे शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत भव्य और अनुशासित दिखाई दिया।
यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों—मिठाई बाजार, सदर बाजार, गोल प्याऊ चौराहा और सुभाष चौक—से होती हुई छबिला हनुमानजी मंदिर पहुंची। यहां कुलदेवी श्री श्रीयादें माता की महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आरती के दौरान समाजजन ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि, समाज की उन्नति और आपसी सौहार्द की कामना की।
धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात गांधीनगर स्थित प्रजापत समाज के सामुदायिक भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठ पुरुषों एवं महिलाओं को उनके योगदान और मार्गदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रदेश उपाध्यक्ष भोलाराम प्रजापत सहित कैलाश महेसरा, गोपाल इनिया, मांगीलाल, हीरालाल, नंदलाल, फतेहलाल, कन्हैयालाल, शंभूलाल, बगदीराम, राजकुमार, गणेश, मदन, भंवरलाल, यशवंत, केसरीमल, नीरज, रमेश, रामप्रसाद, लक्ष्मीनारायण, नारायण, संजय, विजय, शिव, गणपत, रवि, अजय, रौनक सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा साथी उपस्थित रहे।
पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश देखने को मिला। श्री श्रीयादें माता जयंती न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि समाज को जोड़ने और परंपराओं को सहेजने का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत कर गई।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
