काकंरवा, 28 दिसंबर: आकोला स्थित जवाहर नगर के चामुंडा माता मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रामलीला में बुधवार को केवट प्रसंग का मंचन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। रामायण के इस प्रसंग में भगवान श्रीराम, सीता माता और लक्ष्मण के वनवास कालीन यात्रा के दौरान नाविक केवट ने अपनी भक्ति, सेवा और अटूट विश्वास की छवि पेश की।

केवट, जो एक कुशल नाविक थे, ने गंगा नदी पार करते समय श्रीराम के चरणों की धूल से पत्थर को नारी बनाने की शक्ति (अहिल्या प्रसंग) के अनुभव से प्रेरित होकर पहले अपने पैरों को पखारने की इच्छा जताई। इसके पश्चात उन्होंने अपने सेवा भाव के माध्यम से श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को सुरक्षित नदी पार करवा दिया। इस प्रसंग ने न केवल भक्ति और विश्वास का संदेश दिया, बल्कि करुणा और समानता की गहरी मिसाल भी पेश की।

रामलीला के मंचन में यह दृश्य दर्शकों के लिए अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक साबित हुआ। श्रीराम ने केवट की भक्ति और निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर सभी के लिए समान हैं और सच्ची भक्ति एवं सेवा को सर्वोच्च महत्व देते हैं।

नौ दिवसीय रामलीला के दौरान दर्शकों ने इस केवट संवाद को विशेष रूप से सराहा, और यह मंचन मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम की शोभा बढ़ाता हुआ देखा गया। इस आयोजन ने धार्मिक संस्कृति, भक्ति और सामाजिक समानता के मूल्यों को उजागर करते हुए स्थानीय समाज में सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत किया।

समापन में, इस रामलीला मंचन ने दर्शकों को केवल मनोरंजन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भक्ति, सेवा और विश्वास की जीवंत झलक भी दिखाई। आकोला में आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम क्षेत्रीय धार्मिक आयोजनों में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।

Pratahkal Bureau

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