चित्तौड़गढ़। देशभर में रेलवे के लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर आयोजित 48 घंटे के हंगर फास्ट प्रदर्शन का चित्तौड़गढ़ में बुधवार को दूसरा दिन भी लगातार जारी रहा। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने भूखे रहकर गाड़ियों का संचालन कर अपनी मांगों पर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से 50 प्रतिशत बढ़ी हुई डीए के अनुपात में माइलेज अलाउंस में 25 प्रतिशत वृद्धि, किमी भत्ते के 70 प्रतिशत हिस्से को आयकर मुक्त करने, मेल ट्रेन लोको पायलट से अधिकतम 6 घंटे व मालगाड़ी लोको पायलट से 8 घंटे ड्यूटी लेने, दो रात्रि से अधिक रात्रिकालीन ड्यूटी न देने, मुख्यालय से बाहर ड्यूटी को अधिकतम 36 घंटे तक सीमित रखने, महिला रनिंग कर्मचारियों की विशिष्ट शिकायतों का त्वरित निवारण, तथा एनपीएस और यूपीएस रद्द कर ओपीएस बहाल करने की मांगों को प्रमुखता से रखा।

प्रदर्शन का नेतृत्व ज्ञानसिंह मीणा कर रहे थे। इस दौरान विजेन्द्रसिंह चौहान, नानालाल कुमावत, इसरार मोहम्मद, पूर्णप्रकाश श्रीवास्तव, भगवानसिंह, शिवकुमार, रफी, मनीष, मुन्नालाल, पुखराज, अभिलाश, रामकेश, तुलसीराम, विनोद जांगिड़, मुंशीलाल, करणसिंह चौधरी, बलराज, बंटी नायक, राजेश यादव, मिलनडोई, जगदीश, मन्नूसिंह रावत, रमेश मीणा और कालूराम मीणा सहित कई वरिष्ठ और युवा लोको पायलट मौजूद रहे।

इस हंगर फास्ट प्रदर्शन ने न केवल रेलवे कर्मचारियों की मांगों को जोरदार तरीके से उजागर किया, बल्कि रेल प्रशासन और सरकार के लिए गंभीर संकेत भी भेजे। कर्मचारियों की इस लड़ाई से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय रेलवे के कार्यबल की मांगें न केवल न्यायसंगत हैं, बल्कि उनके कार्य वातावरण और मेहनत की उचित मान्यता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी भी हैं।

Pratahkal Bureau

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