कोरपना में बिगर सातबारा धारक शेतमजूरों की मदद की मांग, 16 सितंबर को आंदोलन की चेतावनी
बिगर सातबारा संघटना ने कोरपना में सूखे के कारण कृषि पर निर्भर मजदूरों, ट्रैक्टर चालकों और कामगारों के लिए आर्थिक मदद की मांग की है।

कोरपना तहसील कार्यालय में बिगर सातबारा संघटना के प्रणेता भाई जगदीशकुमार इंगले और कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
महाराष्ट्र के कोरपना में सूखे की स्थिति के बीच खेती पर निर्भर भूमिहीन मजदूरों, कामगारों, ट्रैक्टर मालिकों और चालकों के लिए आर्थिक सहायता की मांग तेज हो गई है। बिगर सातबारा संघटना ने राज्य सरकार से इन वर्गों के लिए अलग से आर्थिक मदद घोषित करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 16 सितंबर को आंदोलन किया जाएगा।
कोरपना तहसील कार्यालय में बिगर सातबारा संघटना के प्रणेता भाई जगदीशकुमार इंगले और कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि सरकार ने सूखे की पृष्ठभूमि में किसानों के लिए सहायता की घोषणा की है, लेकिन खेती पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर बिगर सातबारा धारक खेत मजदूरों, कामगारों, ट्रैक्टर मालिकों और चालकों की आजीविका का सवाल गंभीर बना हुआ है। संगठन ने मांग की कि सरकार इन वर्गों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर उनके लिए भी आर्थिक सहायता घोषित करे।
राज्य में सूखे जैसी परिस्थितियों के कारण कृषि व्यवसाय पर निर्भर अनेक परिवारों के सामने रोजगार और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों को सरकारी सहायता मिलने के बीच खेती से जुड़े अन्य वर्गों को राहत क्यों नहीं दी जा रही है, यह सवाल बिगर सातबारा संघटना ने उठाया है।
खेतों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों, कृषि कार्यों पर निर्भर कामगारों, ट्रैक्टर मालिकों और ट्रैक्टर चालकों का रोजगार काफी हद तक खेती के मौसम पर निर्भर रहता है। बारिश की कमी या सूखे की स्थिति में कृषि कार्य घटने से इन लोगों को काम नहीं मिल पाता। इसका सीधा असर उनके परिवारों की आजीविका पर पड़ता है और घर चलाने का संकट गंभीर हो जाता है। संगठन ने कहा कि केवल सातबारा धारक किसानों को सहायता देने के बजाय खेती पर निर्भर भूमिहीन और बिगर सातबारा धारक परिवारों को भी राहत के दायरे में शामिल किया जाना चाहिए।
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त किसानों के लिए सहायता की घोषणा की है। हालांकि, संगठन का कहना है कि खेती से जुड़े अन्य वर्गों की परेशानियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। खेतों में काम करने वाले मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों, ट्रैक्टर मालिकों और चालकों को भी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को इन वर्गों के लिए अलग सहायता योजना शुरू करनी चाहिए या आर्थिक मदद घोषित कर उन्हें राहत देनी चाहिए।
बिगर सातबारा धारकों की मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से संगठन ने आगामी 16 सितंबर को आंदोलन करने की घोषणा की है। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को और तेज करने का रुख अपना सकता है।
इस ज्ञापन के जरिए बिगर सातबारा धारक खेत मजदूरों, कामगारों और खेती से जुड़े सहायक व्यवसायों पर निर्भर लोगों की समस्याएं एक बार फिर सामने आई हैं। अब कोरपना तहसील के नागरिकों की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है और क्या इन परिवारों को आर्थिक सहायता के दायरे में शामिल किया जाता है।

Manoj Gore (Chandrapur)
नाम: मनोज रामकृष्ण गोरे
वर्तमान पद: रिपोर्टर (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: चंद्रपुर जिला (महाराष्ट्र)
बीट (मुख्य विषय): प्रशासन
परिचय
मनोज रामकृष्ण गोरे महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र के रिपोर्टर हैं। वह मुख्य रूप से चंद्रपुर जिले के प्रशासनिक विभागों की कार्यप्रणाली, सरकारी योजनाओं, जनसुनवाई, विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
मनोज रामकृष्ण गोरे को मीडिया क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्टिंग और समाचार संकलन का 5 वर्ष का अनुभव है। वह पिछले पांच सालों से चंद्रपुर जिले के स्थानीय और प्रशासनिक मुद्दों को नियमित रूप से रिपोर्ट कर रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।
