धनतेरस के बाद से सोने और चांदी की चमक थोड़ी फीकी पड़ गई है। जहां त्योहारों के दौरान दोनों धातुओं की कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई छुई थी, वहीं अब बाजार में लगातार गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। निवेशकों और आम खरीदारों के मन में यही सवाल गूंज रहा है। क्या यह सोना खरीदने का सही वक्त है या थोड़े और इंतजार में है फायदा?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल कीमतों में नरमी बनी रह सकती है। आनंद राठी एंड स्टॉक ब्रोकर्स के मनीष शर्मा का कहना है कि भारत और चीन के बीच व्यापारिक सुधार, वैश्विक आपूर्ति में बढ़ोतरी और निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली के चलते गोल्ड और सिल्वर दोनों पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ हफ्तों की तेजी के बाद बाजार स्वाभाविक रूप से “कूल ऑफ” मोड में है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर डालें तो फेडरल रिजर्व की बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। संभावना है कि फेड ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे सोने के भाव में बड़ा बदलाव नहीं आएगा, लेकिन फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयान निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

वहीं, अमेरिका और चीन के बीच संभावित ट्रेड डील पर बातचीत की खबरों से निवेशकों का रुझान शेयर बाजार की ओर झुक गया है। इस वजह से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिलहाल धीमी पड़ी है।

फिर भी, दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर पर धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करना एक समझदारी भरा कदम माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि साल के अंत तक डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और जियोपॉलिटिकल तनाव एक बार फिर सोने को सहारा दे सकते हैं। ऐसे में अगर आप निवेश के इरादे से सोना खरीदना चाहते हैं, तो यह गिरावट आपके लिए “गोल्डन ऑपर्च्युनिटी” साबित हो सकती है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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