असम के मोरीगांव जिले में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अपनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है। यह प्रोजेक्ट भारत के 76,000 करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सबसे अहम परियोजनाओं में से एक है। लेकिन इस हाई-टेक परियोजना के सामने अब तकनीकी चुनौतियों के साथ-साथ प्राकृतिक खतरे भी खड़े हो गए हैं। यहां न सिर्फ सांपों का डर है, बल्कि जंगली हाथियों की मौजूदगी भी फैक्ट्री के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है।


हाथियों और सांपों का बढ़ा खतरा :



रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोरीगांव जिले का इलाका घने जंगल से घिरा हुआ है। इस वजह से यहां अक्सर हाथियों के झुंड और जहरीले सांप दिखाई देते हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हाथियों के भारी कदमों से जमीन में होने वाला कंपन सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। चिप मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया बेहद संवेदनशील है और यहां आयाम नैनोमीटर में मापे जाते हैं। यानी जरा-सा कंपन भी उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि कंपनी ने अपने प्लांट के चारों ओर एक मजबूत और ऊंची ‘Elephant Proof’ दीवार बनाने का काम शुरू कर दिया है।


क्यों जरूरी है हाथी-रोधी दीवार ?


विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों के चलते होने वाला कंपन चिप बनाने वाली मशीनों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। अगर जमीन हल्की सी हिली, तो माइक्रोमीटर स्तर पर भी गड़बड़ी हो सकती है। इससे उपकरणों में एरर आ सकता है, माप बिगड़ सकते हैं और पैटर्न गड़बड़ा सकते हैं। नतीजा यह होगा कि तैयार हो रही चिप्स खराब हो सकती हैं और करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। एक एक्सपर्ट के मुताबिक, “अगर वाइब्रेशन आधा माइक्रोन भी इधर-उधर हुआ, तो हर पिन गलत जगह पर शिफ्ट हो जाएगा और पूरी असेंबली बिगड़ जाएगी।” यही वजह है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अपनी यूनिट को सुरक्षित रखने के लिए यह खास दीवार बना रही है।


सांपों से बचाव के लिए खास टीम :


सिर्फ हाथी ही नहीं, बल्कि जहरीले सांप भी बड़ी चुनौती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कंपनी ने एक विशेष बचाव टीम को नियुक्त किया है। यह टीम फैक्ट्री परिसर में दिखाई देने वाले सांपों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर जंगल में छोड़ देती है। इस तरह कर्मचारियों और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।


राज्य सरकार का पूरा समर्थन :



असम सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर लगातार सक्रिय है। यह यूनिट देश के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर मिशन का हिस्सा है और सरकार चाहती है कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को किसी भी तरह की बाधा न आए। राज्य सरकार सुरक्षा इंतजामों में मदद कर रही है और प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए कंपनी के साथ साझेदारी कर रही है।


भविष्य के लिए बड़ा दांव :


भारत सेमीकंडक्टर मिशन का मकसद देश को माइक्रोचिप्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है। ऐसे में असम में लग रहा यह OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) प्लांट बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन इसे सफल बनाने के लिए न सिर्फ तकनीकी खामियों से जूझना होगा, बल्कि जंगल और वन्यजीवों की चुनौतियों से भी पार पाना होगा।


साफ है कि असम में हाई-टेक प्रोजेक्ट लगाने का फैसला आसान नहीं था। लेकिन सुरक्षा उपायों और ‘Elephant Proof’ दीवार की मदद से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स अब अपनी यूनिट को हर चुनौती से बचाकर आगे बढ़ाने की कोशिश में है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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