आईटी मार्केट में बड़ा गेम शुरू; इन दो शेयरों से मिल सकता है तगड़ा रिटर्न
देश की आईटी इंडस्ट्री इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रही है। दो साल की सुस्ती के बाद अब सेक्टर एआई के बढ़ते दबदबे से नई चुनौती के मोड़ पर खड़ा है.

देश की आईटी इंडस्ट्री, जिसने कभी भारत को ग्लोबल टेक मैप पर मजबूत पहचान दिलाई थी, अब पिछले दो साल से सुस्ती के दौर में फंसी हुई है। एआई (Artificial Intelligence) की तेज़ रफ्तार ने इस सेक्टर के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। बढ़ते ऑटोमेशन, घटते विदेशी ऑर्डर्स और तिमाही नतीजों में आई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब हालात धीरे-धीरे स्थिर हो रहे हैं और 2026 के शुरुआती महीनों में आईटी सेक्टर एक बार फिर रफ्तार पकड़ सकता है।
तिमाही नतीजों की बात करें तो देश की दिग्गज कंपनियां TCS, Infosys और HCL Technologies उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं, लेकिन राहत यह रही कि उनके रेवेन्यू और मार्जिन में गिरावट नहीं आई। कुछ कंपनियों ने तो अनुमान से बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाज़ार को चौंका दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग आधी प्रमुख आईटी कंपनियों का रेवेन्यू और प्रॉफिट मार्जिन अपेक्षाओं से ऊपर रहा है, जो इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है।
वहीं, इस समय निवेशकों की नज़र दो खास शेयरों पर टिकी है HCL Technologies और Coforge। ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का मानना है कि इन दोनों कंपनियों में आने वाले महीनों में अच्छा उछाल देखने को मिल सकता है। HCL Tech के शेयर के लिए 1800 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया गया है। फिलहाल कंपनी के शेयर 1527 रुपये के आस-पास कारोबार कर रहे हैं। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू पिछली तिमाही से 2.4% बढ़ा, जबकि EBITA मार्जिन 17.4% दर्ज किया गया। कंपनी के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स का बैकलॉग है, जिसके चलते इसका वैल्यूएशन साल-दर-साल 16% बढ़ा है।
वहीं, Coforge के शेयर पर भी निवेशकों की नज़र है। ब्रोकरेज ने इसका टारगेट 2400 रुपये रखा है। हाल की तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 5.9% और नेट प्रॉफिट 18% बढ़ा है। 14% EBITA मार्जिन और 1.6 बिलियन डॉलर की ऑर्डर बुक के साथ कोफोर्ज आने वाले साल में बेहतर ग्रोथ की स्थिति में नजर आ रही है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि आईटी सेक्टर अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटा है। एआई का दबाव, जॉब कट और विदेशी क्लाइंट्स से घटते ऑर्डर्स जैसी चुनौतियां बरकरार हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह सही समय है कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला न लें, बल्कि कंपनियों की दीर्घकालिक रणनीति और बाजार के रुझानों पर बारीकी से नज़र रखें।
(डिस्क्लेमर : यहां दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। मार्केट में निवेश जोखिम के अधीन है, इसलिए निवेश से पहले वित्तीय सलाह अवश्य लें।)

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
