मुंबई। वित्तीय बाजारों में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच चांदी एक बार फिर निवेशकों के लिए आकर्षक निवेश विकल्प के रूप में उभर रही है। पिछले दो हफ्तों में 18% की तेज गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में इसकी कीमतों में मजबूत उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर की कीमतें निकट भविष्य में 50 से 55 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती हैं, जबकि वर्ष 2026 के अंत तक यह 75 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।

मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च एनालिस्ट मानव मोदी के अनुसार, घरेलू स्तर पर भी सिल्वर की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल सकती है। उन्होंने बताया कि यदि अमेरिकी डॉलर 90 के स्तर के आसपास स्थिर रहता है, तो भारतीय बाजार में चांदी की कीमतें 2,40,000 रुपये प्रति किलो तक जा सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 16 अक्टूबर 2025 को सिल्वर की कीमत 54.45 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई थी, जो हाल में घटकर 48.59 डॉलर पर आ गई। इसी तरह, घरेलू बाजार में 14 अक्टूबर को 1,82,500 रुपये प्रति किलो का भाव अब गिरकर 1,49,500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और सुरक्षित निवेश विकल्पों (Safe Haven Assets) की मांग में कमी के कारण देखी गई है।

विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों ने हाल के महीनों में शेयर बाजारों और वैकल्पिक संपत्तियों में रुझान बढ़ाया है, जिससे कीमती धातुओं में निवेश की मांग अस्थायी रूप से घटी है। हालांकि, दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में चांदी की औद्योगिक उपयोगिता इसे फिर से निवेशकों की प्राथमिकता में ला सकती है।

पिछले एक वर्ष में चांदी ने निवेशकों को उल्लेखनीय रिटर्न दिया है — डॉलर में 44% और रुपये में 55.72% तक। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान आने वाले वर्षों में भी जारी रह सकता है। ग्रीन एनर्जी, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी बढ़ती औद्योगिक मांग तथा सीमित आपूर्ति की स्थिति सिल्वर की कीमतों में दीर्घकालिक तेजी का संकेत दे रही है।

डीएसपी म्यूचुअल फंड के हेड – पैसिव इन्वेस्टमेंट्स एंड प्रोडक्ट्स अनिल घेलानी ने बताया कि हाल के वर्षों में सिल्वर की वैश्विक सप्लाई में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है, जिससे बाजार में लगातार आपूर्ति घाटा बना हुआ है। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में अनुमानित सप्लाई घाटा 11.8 करोड़ औंस तक रह सकता है, जो भविष्य में कीमतों में वृद्धि की दिशा में स्पष्ट संकेत है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता, डॉलर की मजबूती और ग्रीन टेक्नोलॉजी की बढ़ती मांग सिल्वर को आने वाले वर्षों में एक रणनीतिक और लाभदायक निवेश विकल्प बना सकती है। ऐसे में, सोने के बाद अब निवेशकों की नजरें फिर से उस धातु पर टिक गई हैं, जो न केवल पारंपरिक मूल्य का प्रतीक है, बल्कि आधुनिक उद्योगों की रीढ़ भी बन चुकी है — सिल्वर।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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