नई दिल्ली। आने वाले समय में चांदी निवेशकों को बड़ा मुनाफा दे सकती है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अगले 12 महीनों में चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि घरेलू बाजार में चांदी का भाव धीरे-धीरे बढ़कर 1.35 लाख रुपये प्रति किलो और फिर 1.50 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक बाजार में भी चांदी की कीमत $50 प्रति औंस का स्तर छू सकती है। अभी तक 2024 में चांदी ने मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर करीब 37% का रिटर्न दिया है, जो अन्य कई एसेट क्लासेस की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।



तेजी के पीछे कारण

चांदी की कीमतों में यह तेजी कई कारणों से हो रही है।

मजबूत औद्योगिक मांग – अमेरिकी सिल्वर इंस्टीट्यूट का अनुमान है कि 2025 में कुल चांदी उत्पादन का लगभग 60% हिस्सा औद्योगिक मांग से जुड़ा होगा। इसमें सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और 5G इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी ग्रीन टेक्नोलॉजी से आने वाली मांग अहम होगी।

कमजोर डॉलर – अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें निवेशकों को सुरक्षित एसेट्स की ओर खींच रही हैं।

भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता – इन कारकों के चलते चांदी एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखी जा रही है।

केंद्रीय बैंकों की रुचि – रूस ने हाल ही में अपने राज्य रिजर्व के लिए चांदी खरीदने की घोषणा की है और अगले तीन वर्षों में $535 मिलियन की राशि आवंटित की है। वहीं सऊदी अरब के केंद्रीय बैंक ने भी करीब $40 मिलियन सिल्वर-लिंक्ड ईटीएफ में निवेश किए हैं।



भारत में चांदी की मांग

घरेलू स्तर पर भी भारत में चांदी की खपत और निवेश तेज़ी से बढ़ रहे हैं। 2025 की पहली छमाही में ही भारत ने 3,000 टन से अधिक चांदी का आयात किया है। साथ ही, सिल्वर ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इतनी तेज़ बढ़ोतरी के बाद अल्पावधि में प्रॉफिट बुकिंग यानी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि मौजूदा स्तरों से चांदी 1.15 लाख से 1.18 लाख रुपये प्रति किलो तक नीचे आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को रणनीति बनाकर निवेश करना चाहिए।

बाजार का रुख

यह लगातार पांचवां साल है जब बाजार में आपूर्ति घाटा बना हुआ है, जो समग्र मांग को और मजबूत करता है। इस साल कॉमेक्स पर चांदी ने अब तक 41.6% की बढ़त हासिल की है, जबकि सोने ने 34.6% और कॉपर जैसे बेस मेटल्स ने सिर्फ 14% का रिटर्न दिया है।


विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग, ग्रीन टेक्नोलॉजी, केंद्रीय बैंकों की खरीद और कमजोर डॉलर जैसे कारक आने वाले महीनों में चांदी की कीमतों को लगातार सहारा देंगे। हालांकि निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बीच सतर्क रहकर कदम बढ़ाना होगा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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