चावल उत्पादन हुआ रिकॉर्ड 12.45 करोड़ टन ; दलहन‑तिलहन में गिरावट की चेतावनी
खरीफ 2025‑26 में भारत में चावल उत्पादन रिकॉर्ड 12.45 करोड़ टन हुआ, लेकिन दलहन और तिलहन की पैदावार गिरने के संकेत मिले हैं। चावल में सफलता के बीच दाल‑तिलहन की कमी किसानों और खाद्य बाजार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

चावल उत्पादन
नई दिल्ली: 2025‑26 के खरीफ मौसम में भारत के कृषि क्षेत्र ने चावल (पैडी से चावल तक) उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कृषि मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, इस साल चावल का उत्पादन 12.45 करोड़ टन रहा, जो अब तक का उच्चतम आंकड़ा है। इस उच्च उत्पादन के पीछे पर्याप्त वर्षा, बेहतर सिंचाई सुविधाएँ और खेतों में व्यापक पैदावार मुख्य कारण माने जा रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार उत्पादन में लगभग 1.4% की वृद्धि देखी गई है, जो भारतीय खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के लिए राहत की खबर है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस वृद्धि से किसानों को लाभ मिलेगा और घरेलू भंडारण एवं खाद्य आपूर्ति में मजबूती आएगी। देश के प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में पर्याप्त उत्पादन ने स्थानीय बाजारों और अंतरराज्यीय आपूर्ति श्रृंखला को भी लाभ पहुँचाया है।
हालांकि, सिर्फ चावल ही खरीफ फसलों में सफल नहीं रहा। दलहन (pulses) और तिलहन (oilseeds) की पैदावार में गिरावट देखने को मिली है। कृषि मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस साल दलहन और तिलहन की फसलों का उत्पादन कम होने की संभावना है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, खरीफ के दौरान दलहन‑तिलहन उत्पादन में कुल लगभग 3.20 लाख टन की कमी हो सकती है। यह गिरावट मुख्यतः मौसम की असामान्य परिस्थितियों और भूमि उपयोग पैटर्न में बदलाव के कारण हो रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, दलहन और तिलहन की घटती पैदावार उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। यदि उपयुक्त नीतिगत हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में दाल और तेलहन की कीमतों में उछाल देखा जा सकता है। इसके साथ ही, किसानों की आमदनी पर भी दबाव पड़ेगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां दलहन‑तिलहन मुख्य फसल हैं।
कुल मिलाकर, इस साल चावल उत्पादन का रिकॉर्ड आंकड़ा देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है, लेकिन दलहन‑तिलहन की गिरावट किसानों और बाजार दोनों के लिए चुनौती प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उपयुक्त सरकारी नीतियाँ और किसानों को प्रोत्साहन देकर इस असंतुलन को संतुलित किया जा सकता है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
