अमेरिका में 43 दिनों से ठप पड़ी सरकारी व्यवस्था आखिरकार दोबारा पटरी पर लौट आई, लेकिन इस राहत के बीच एशियाई बाजारों में गुरुवार को ऐसा माहौल बना, जिसने निवेशकों को एक साथ सतर्क भी किया और चौकन्ना भी. अमेरिकी शटडाउन के अंत के बाद वैश्विक बाज़ारों की पहली प्रतिक्रिया मिश्रित रही—कुछ इंडेक्स ने बढ़त दिखाई, तो कुछ बुरी तरह लड़खड़ा गए.


वाशिंगटन में बुधवार को अमेरिकी संसद ने उस अहम बिल को पास कर दिया, जिसने लंबे शटडाउन पर विराम लगा दिया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर कर बिल को अंतिम स्वीकृति दे दी, जिसके साथ ही वे सभी सरकारी विभाग दोबारा शुरू हो गए जो हफ्तों से बंद पड़े थे. वित्तीय दुनिया को राहत की यह खबर मिलते ही एशियाई बाजारों में हलचल तेज हो गई, लेकिन तस्वीर जितनी साफ दिखी, उससे कहीं ज़्यादा धुंधली भी थी.


टोक्यो के निक्केई ने दिन की शुरुआत मजबूती के साथ की और 88 अंकों यानी 0.17% की बढ़त के साथ 51,152 पर ट्रेड करता दिखा. चीन के शंघाई कंपोज़िट ने भी हरे निशान में कदम रखा और लगभग 18 अंकों की बढ़त दर्ज की. पर सबसे अधिक ध्यान खींचा शेन्ज़ेन ने, जिसने 238 अंकों की दमदार छलांग लगाते हुए सकारात्मक संकेत दिए.

वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स (HSI) गिरावट के दबाव से निकल न सका और 156 अंक फिसलकर 26,766 पर पहुंच गया. दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी कमजोर रुख़ अपनाए रहा और हल्की दो अंकों की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखा.


हालाँकि शटडाउन का खत्म होना एक बड़ी राहत है, लेकिन बाज़ारों में वह भरोसा अभी नहीं लौट पाया जिसकी उम्मीद की जा रही थी. इसकी सबसे अहम वजह है—डेटा की कमी. व्हाइट हाउस ने साफ किया कि शटडाउन के कारण अक्टूबर महीने के रोजगार और महंगाई के आंकड़े जारी नहीं किए जा सकेंगे, क्योंकि डेटा कलेक्शन ही रुक गया था.

इस अनिश्चितता ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है. बाज़ार को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वास्तविक हालत का स्पष्ट चित्र नहीं मिल पा रहा. टेक सेक्टर भी इसकी चोट महसूस कर रहा है, और हाई-वैल्यू टेक स्टॉक्स में सतर्कता साफ दिख रही है.


भारतीय बाजारों पर भी इसका असर साफ-साफ दिखा. गुरुवार सुबह सेंसेक्स कमजोर होकर खुला, और निफ्टी ने भी लाल निशान में ट्रेडिंग शुरू की. वैश्विक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने घरेलू बाजारों की कमर कस दी है.

शटडाउन का अंत हालांकि आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है, लेकिन डेटा की कमी, फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर असमंजस और टेक सेक्टर में डर ने एशियाई व भारतीय बाजारों को संतुलित लेकिन सतर्क रुख़ अपनाने पर मजबूर कर दिया है.


अभी दुनिया की नज़र इस बात पर टिक गई है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के अधूरे डेटा के बीच फेड क्या रुख अपनाता है और आगामी दिनों में यह वैश्विक बाजारों के मूड को किस दिशा में ले जाता है. शटडाउन खत्म हो गया है, लेकिन वैश्विक बाजारों के सामने असली परीक्षा अब

शुरू हुई है.

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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