बीते कुछ वर्षों में lab-grown diamond यानी कृत्रिम हीरे, आभूषण उद्योग में बड़ी तेजी से उभरे हैं। अब सवाल यह है कि क्या ये हीरे प्राकृतिक हीरों की जगह ले सकते हैं, या फिर अब भी "किंग ऑफ जेम्स" का ताज प्राकृतिक हीरे के पास ही रहेगा? प्राकृतिक हीरे पृथ्वी की परतों में करोड़ों वर्षों के दबाव और तापमान से तैयार होते हैं, जबकि लैब में बने हीरे वैज्ञानिक तकनीक से कुछ ही हफ्तों में बनाए जा सकते हैं। इनका निर्माण मुख्य रूप से दो तरीकों से होता है , High Pressure High Temperature (HPHT) और Chemical Vapor Deposition (CVD)। इन दोनों तकनीकों ने लैब ग्रोन हीरों को प्राकृतिक हीरों जितना ही परिष्कृत और सुंदर बना दिया है।

गुणवत्ता की दृष्टि से दोनों में लगभग समानता है। भौतिक, रासायनिक और ऑप्टिकल स्तर पर दोनों ही हीरों में अंतर पहचानना मुश्किल होता है। GIA और IGI जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ लैब ग्रोन हीरों को भी प्रमाणित कर रही हैं। इसके बावजूद, प्राकृतिक हीरों में दुर्लभता और भावनात्मक मूल्य वह पहलू है जो उन्हें अब भी खास बनाता है। कीमत के लिहाज से लैब ग्रोन हीरे 60 से 70 प्रतिशत तक सस्ते होते हैं। पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के कारण ये न केवल नैतिक विकल्प माने जा रहे हैं बल्कि सतत उपभोग की दिशा में भी कदम हैं। सूरत जैसे भारतीय शहर अब लैब हीरे के उत्पादन और पॉलिशिंग दोनों के लिए वैश्विक केंद्र बन रहे हैं, जिससे देश नए रोजगार और निर्यात अवसर पा रहा है।


निवेश के दृष्टिकोण से स्थिति थोड़ी अलग है। प्राकृतिक हीरे अपनी सीमित उपलब्धता और स्थायी मूल्य के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में माने जाते हैं, जबकि लैब-ग्रोन हीरों की कीमत तकनीकी कारणों से घट सकती है। इसी वजह से निवेशक आज भी प्राकृतिक हीरों को प्राथमिकता देते हैं। यदि कोई उपभोक्ता अपने बजट में एक सुंदर और नैतिक विकल्प चाहता है, तो लैब-ग्रोन हीरा सबसे उपयुक्त रहेगा। वहीं, जो व्यक्ति दीर्घकालीन मूल्य, प्रतिष्ठा और पारिवारिक विरासत को महत्व देता है, उसके लिए प्राकृतिक हीरा बेहतर विकल्प है।

उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले पाँच वर्षों में लैब-ग्रोन हीरों की मांग दोगुनी हो सकती है, लेकिन प्राकृतिक हीरे का आकर्षण पूरी तरह कम नहीं होगा। दोनों ही अपने-अपने बाजार में बने रहेंगे: लैब-ग्रोन हीरे एक आधुनिक और किफायती विकल्प के रूप में, और प्राकृतिक हीरे पारंपरिक, मूल्यवान और निवेश योग्य प्रतीक के रूप में।

भारत में 2025 में प्राकृतिक हीरों की कीमत प्रति कैरेट लगभग ₹70,000 से ₹10,00,000 के बीच है, जो हीरे की गुणवत्ता (कट, रंग, क्लैरिटी) और प्रमाणन पर निर्भर करती है। उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरे ₹4,00,000 से ₹10,00,000 प्रति कैरेट तक बिकते हैं, जबकि मध्यम गुणवत्ता के हीरे ₹1,50,000 से ₹4,00,000 प्रति कैरेट की रेंज में मिलते हैं। छोटे आकार के हीरे ₹40,000 से शुरू होते हैं, लेकिन गुणवत्ता के आधार पर कीमत में काफी अंतर हो सकता है।


इसके मुकाबले, लैब ग्रोन हीरे की कीमत बहुत कम होती है और वे ₹30,000 से ₹80,000 प्रति कैरेट की रेंज में उपलब्ध होते हैं, जो भारतीय बाजार में अधिक किफायती विकल्प प्रदान करते हैं। वैश्विक स्तर पर भी लैब ग्रोन हीरे सस्ते और पर्यावरणीय रूप से अनुकूल विकल्प के तौर पर लोकप्रिय हो रहे हैं, जबकि प्राकृतिक हीरे अभी भी अपनी दुर्लभता और निवेश मूल्य के कारण महंगे और वांछनीय बने हुए हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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