भारत की मौद्रिक नीति की दिशा एक बार फिर वैश्विक आर्थिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। यदि यह अनुमान सच साबित होता है, तो रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ जाएगी जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाएगा।

भारत में खुदरा मुद्रास्फीति में लगातार कमी आ रही है और यही गिरावट मौद्रिक नीति में नरमी की मुख्य वजह मानी जा रही है। मॉर्गन ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति पिछले कुछ महीनों से आश्चर्यजनक रूप से नीचे की ओर झुकान दिखा रही है, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता और मांग वृद्धि के संकेत मजबूत हुए हैं। रिपोर्ट का यह भी कहना है कि यदि यह ट्रेंड जारी रहता है तो RBI के सामने नीति ढील देने का मजबूत आधार तैयार होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का घरेलू वातावरण तुलनात्मक रूप से मजबूत बना हुआ है। निवेश गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर है और चालू खाते का घाटा नियंत्रित स्तर पर बना हुआ है। इन परिस्थितियों ने भारत को मौद्रिक नीति में लचीलापन बरतने की क्षमता दी है।

हालाँकि, मॉर्गन ने यह भी स्पष्ट किया है कि दरों में कटौती का अंतिम निर्णय पूरी तरह डेटा-परक होगा। RBI के सामने चुनौती यह है कि एक ओर वह विकास को गति देना चाहता है, वहीं दूसरी ओर मुद्रास्फीति को दीर्घकालिक रूप से नियंत्रण में रखना भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए केंद्रीय बैंक किसी भी निर्णय से पहले वित्तीय स्थिरता, ऋण प्रवाह, खाद्य कीमतों और वैश्विक तेल बाजार के प्रभावों का विस्तृत मूल्यांकन करेगा।

RBI की तरफ से अभी तक ऐसी किसी कटौती की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मौजूदा आर्थिक संकेतक इसी तरह संतुलित बने रहते हैं, तो वर्ष के अंत तक दरों में नरमी की राह साफ हो सकती है। दर कटौती का सीधा प्रभाव कर्ज बाजार पर पड़ेगा, होम लोन, ऑटो लोन और MSME सेक्टर को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे आर्थिक गतिविधियाँ और तेज हो सकती हैं।

फिलहाल, दिसंबर 2025 की MPC बैठक को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। मॉर्गन का यह अनुमान न केवल मौद्रिक नीति की संभावित दिशा को संकेत करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि वैश्विक वित्तीय संस्थान भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता और विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बने हुए हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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