India - South Korea व्यापारिक संबंध में नई साझेदारी ; हरदीप पुरी ने हुंडई से की शिपबिल्डिंग सहयोग चर्चा
सियोल में एचडी हुंडई चेयरमैन चुंग की-सन और मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बैठक ने भारत-कोरिया शिपबिल्डिंग सहयोग को नई ऊँचाई दी। ‘मैरिटाइम अमृत काल विज़न 2047’ के तहत 24 अरब डॉलर निवेश, कोचीन शिपयार्ड समझौता और वैश्विक शीर्ष-5 लक्ष्य पर चर्चा। भारत का समुद्री भविष्य अब दक्षिण कोरिया के साथ मजबूत हो रहा है।

India Korea Shipbuilding
भारत और साउथ कोरिया के बीच एक ऐतिहासिक मुलाकात हुई है। इस बिच व्यापारिक संबंध के बारे में बातचीत हुई है। दक्षिण कोरिया की दिग्गज शिपबिल्डिंग कंपनी एचडी हुंडई के चेयरमैन चुंग की-सन और भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई वार्ता ने दोनों देशों के बीच जहाज निर्माण और समुद्री उद्योग में सहयोग की नई इबारत लिखी। यह बैठक केवल एक राजनयिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग के शीर्ष पांच देशों में शामिल करने की महत्वाकांक्षी योजना का ठोस कदम थी।
सियोल में आयोजित इस उच्चस्तरीय चर्चा में दोनों पक्षों ने भारत की जहाज निर्माण क्षमता को सशक्त बनाने, उन्नत तकनीकों के हस्तांतरण और संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर गहन विमर्श किया। एचडी हुंडई ने आधिकारिक बयान में कहा कि कंपनी भारत के शिपबिल्डिंग उद्योग को मजबूत करने में सबसे विश्वसनीय साझेदार बनने को प्रतिबद्ध है। मंत्री पुरी ने भी नियमित संवाद और सहयोग से दोनों देशों के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की उम्मीद जताई।
यह मुलाकात ‘मैरिटाइम अमृत काल विज़न 2047’ के तहत भारतीय प्रतिनिधिमंडल के दक्षिण कोरिया दौरे का हिस्सा थी। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत भारत सरकार 24 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जिसमें से 8 अरब डॉलर की प्रारंभिक राशि अक्टूबर में ही स्वीकृत हो चुकी है। इसका उद्देश्य भारत के जहाज बेड़े को मौजूदा 1,500 से बढ़ाकर 2,500 तक ले जाना और वैश्विक शिपबिल्डिंग मानचित्र पर देश को मजबूत स्थिति दिलाना है।
दोनों देशों के बीच सहयोग की नींव पहले से ही रखी जा चुकी है। जुलाई में एचडी हुंडई ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जो किसी दक्षिण कोरियाई शिपबिल्डर और भारतीय कंपनी के बीच पहला औपचारिक करार है। इस साझेदारी से न केवल तकनीकी हस्तांतरण होगा, बल्कि हजारों रोजगार सृजन और अरबों डॉलर का निवेश भी आकर्षित होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समुद्री क्षेत्र अब भारत की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बन चुका है। हाल ही में विझिंजम पोर्ट देश का पहला डीप-वॉटर अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब बना, जबकि कांडला पोर्ट ने देश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन सुविधा शुरू कर इतिहास रचा। ‘मैरिटाइम इंडिया विज़न’ के तहत अब तक 150 से अधिक पहलें सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी हैं, जिनसे बंदरगाहों की क्षमता, जहाज निर्माण और समुद्री व्यापार में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं।
यह सहयोग केवल तकनीकी या आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। वैश्विक शिपबिल्डिंग में चीन के वर्चस्व को चुनौती देने की भारत की महत्वाकांक्षा में दक्षिण कोरिया जैसे विश्वस्तरीय साझेदार का साथ मिलना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। सियोल की इस मुलाकात ने साबित कर दिया कि भारत का समुद्री क्षितिज अब सीमाओं से परे विस्तार ले रहा है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
