मुंबई। जहां शेयर बाजार पिछले एक वर्ष में लगभग स्थिर बने रहे, वहीं कीमती धातुओं ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को नई रोशनी दी है। बीते बारह महीनों में सोना और चांदी दोनों ने अभूतपूर्व तेजी दिखाई है, जिसने न केवल निवेशकों का विश्वास लौटाया बल्कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच सुरक्षित निवेश की पहचान को भी मजबूत किया है।

पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में अब तक 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 1.21 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, चांदी की चमक इससे भी अधिक रही—इसकी कीमतें 50 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 1.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक जा पहुंची हैं। एक साल पहले, यानी अक्टूबर 2024 में, सोने की दर लगभग 78,240 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जबकि चांदी करीब 92 से 93 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के बीच कारोबार कर रही थी।

इसके उलट, शेयर बाजारों ने निवेशकों को खास फायदा नहीं दिया। बीते वर्ष की इसी अवधि में सेंसेक्स 81,000 अंकों के करीब था और वर्तमान में भी लगभग उसी स्तर पर बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों के लिए सोना और चांदी एक बार फिर ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश विकल्प) के रूप में उभरे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2025 की शुरुआत में अमेरिका में हुए सत्ता परिवर्तन और वहां की व्यापार नीतियों में आए बदलावों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ा दी। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य एशिया में जारी तनाव ने पहले से ही बाजारों में अस्थिरता पैदा कर रखी थी। इन परिस्थितियों में, निवेशकों ने जोखिमभरे शेयर बाजारों से दूरी बनाकर सोना और चांदी जैसे पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया।

एमके ग्लोबल फाइनेंस सर्विसेज की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि इस वर्ष खासतौर पर चांदी की मांग में तेज उछाल देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में चांदी का उत्पादन उसकी बढ़ती मांग के अनुपात में नहीं बढ़ पा रहा है, जिससे कीमतों में निरंतर तेजी बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चांदी के दामों में उछाल का सीधा असर इसके उत्पादन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है। उदाहरण के तौर पर, हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में पिछले कुछ सप्ताहों से उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी अब केवल आभूषणों या सजावटी वस्तुओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि आधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा के युग में यह एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में उभर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, टेलीस्कोप और अन्य उच्च तकनीकी उत्पादों के निर्माण में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। अमेरिका, चीन और भारत इस मांग के सबसे बड़े केंद्र हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट ने भी घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों को बल दिया है। चूंकि ये धातुएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में मूल्यांकित होती हैं, इसलिए रुपये की कमजोरी से इनके भारतीय बाजार मूल्य में स्वतः वृद्धि देखी जा रही है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरों में अस्थिरता और मुद्रा उतार-चढ़ाव जारी रहेंगे, तब तक कीमती धातुओं का यह तेज़ी भरा दौर जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल इसे एक सुरक्षित और लाभदायक निवेश विकल्प मान रहे हैं, खासकर तब जब पारंपरिक बाजार अभी स्थिर हैं।

एक वर्ष की इस अद्भुत रफ्तार ने यह साबित कर दिया है कि अनिश्चितताओं से भरे समय में भी सोना और चांदी की चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। जहां शेयर सूचकांक ठहराव में हैं, वहीं इन धातुओं ने निवेशकों को स्थिरता और भरोसे का सुनहरा विकल्प प्रदान किया है—एक बार फिर यह दिखाते हुए कि जब बाजार हिचकते हैं, तब कीमती धातुएं इतिहास दोहराने लगती हैं।


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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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