देश में प्रवर्तन निदेशालय के नाम पर बढ़ते धोखाधड़ी के मामलों ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। नकली समन भेजकर लोगों को ठगने की घटनाओं ने न केवल आम नागरिकों को डराया है, बल्कि असली और फर्जी दस्तावेज़ों के बीच फर्क करना भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इसी संकट के बीच सरकार ने एक महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से उन्नत फैसला लिया है अब ईडी के सभी समन क्यूआर कोड और यूनिक पासकोड के साथ जारी किए जाएंगे, ताकि किसी भी दस्तावेज़ की प्रामाणिकता तुरंत जांची जा सके।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि कई मामलों में फर्जी समन इतने विश्वसनीय तरीके से तैयार किए जाते हैं कि आम नागरिकों के लिए असली समन से अंतर करना कठिन हो जाता है। नए सिस्टम के तहत ईडी द्वारा जारी हर समन सिस्टम-जनरेटेड होगा और उस पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने या ईडी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी सत्यता की पुष्टि की जा सकेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईडी किसी भी प्रकार की डिजिटल या ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करता। हाल के महीनों में जालसाजों द्वारा “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर पुलिस, कस्टम, ईडी, सीबीआई और आरबीआई के अधिकारी बनकर लोगों को धमकाने और उनसे धन उगाहने की घटनाएं तेजी से सामने आई हैं। इस संदर्भ में मंत्रालय ने नागरिकों को सावधानी बरतने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क का तुरंत सत्यापन करने की सलाह दी है।

भारत के संविधान में ‘पुलिस’ और ‘पब्लिक ऑर्डर’ को राज्य के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। ऐसे में साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड की रोकथाम, जांच और कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर होती है। केंद्र सरकार इन एजेंसियों के लिए आवश्यक संसाधन और सलाह उपलब्ध कराकर उनकी क्षमता बढ़ाने में सहयोग करती है।

साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी को नियंत्रित करने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी एक अहम कदम उठाया है। ट्राई ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा क्षेत्र की सभी संस्थाओं के लिए ‘1600’ नंबरिंग श्रृंखला को अनिवार्य कर दिया है। दूरसंचार विभाग द्वारा आवंटित यह श्रृंखला नागरिकों को विश्वसनीय स्रोतों से आने वाली कॉल की पहचान करने में मदद करेगी और फर्जी कॉल्स से जुड़े फ्रॉड को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सरकार, नियामक संस्थानों और सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयास एक बड़े उद्देश्य की ओर संकेत करते हैं—डिजिटल युग में नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत बनाना। बढ़ते साइबर अपराधों के बीच यह पहल न केवल भरोसे को कायम करेगी, बल्कि डिजिटल व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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