भारतीय करेंसी हाल के दिनों में काफी दबाव में रही है। लगातार गिरावट के चलते यह एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शामिल हो चुकी थी। लेकिन मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपये ने खुद को संभाला और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दर्ज की। शुरुआती ट्रेडिंग में रुपया 25 पैसे चढ़कर 88.01 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार को यह 88.27 के स्तर पर खुला था। इस सुधार के साथ निवेशकों को उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में करेंसी मार्केट में स्थिरता लौट सकती है।


क्यों आई रुपये में मजबूती ?


विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी की यह मजबूती अंतरराष्ट्रीय कारकों से जुड़ी हुई है। अमेरिकी डॉलर हाल ही में कमजोर हुआ है, जिसका सीधा असर Indian Rupee vs US Dollar पर पड़ा है। इसके अलावा घरेलू शेयर बाजार में तेजी और निवेशकों की सकारात्मक धारणा ने भी रुपये को सहारा दिया। हालांकि, इसके बावजूद रुपये पर दबाव बरकरार है। इस साल अब तक भारतीय करेंसी में 2.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। केवल इसी महीने में रुपये में 0.34 प्रतिशत की कमजोरी आई है।


क्या करेगा RBI?



फॉरेक्स मार्केट के जानकारों का कहना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रुपये की गिरावट को रोकने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के हेड ऑफ ट्रेजरी अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि हाल की ऐतिहासिक गिरावट के बाद आरबीआई की ओर से कदम उठाने की संभावना बढ़ गई है। वहीं, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी साफ किया है कि सरकार रुपये की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही है और निर्यातकों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।


वैश्विक अनिश्चितता का असर :



रुपये पर दबाव का सबसे बड़ा कारण वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका की आक्रामक नीतियां मानी जा रही हैं। अमेरिका के भारी-भरकम टैरिफ ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है। इसके चलते निवेशक डॉलर को सुरक्षित ठिकाना मानते हैं, जिससे Indian Rupee vs US Dollar में डॉलर की स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सोने की रिकॉर्ड ऊंचाई भी भारतीय करेंसी पर असर डाल रही है। मंगलवार को जहां शेयर बाजार में तेजी देखी गई, वहीं सोना ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। इससे विदेशी निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिला है।


आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रुपये की चाल काफी हद तक वैश्विक हालात और घरेलू नीतियों पर निर्भर करेगी। अगर आरबीआई बाजार में दखल देता है और सरकार निर्यातकों के लिए राहत पैकेज लेकर आती है, तो रुपये को सहारा मिल सकता है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भारतीय करेंसी के लिए चुनौती बने रहेंगे। स्पष्ट है कि मौजूदा हालात में Indian Rupee vs US Dollar एक बेहद अहम विषय बन चुका है। रुपये की मजबूती भले ही निवेशकों को राहत दे रही हो, लेकिन अनिश्चितताओं के बीच करेंसी मार्केट का उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। आने वाले महीनों में RBI और सरकार की रणनीति तय करेगी कि रुपया डॉलर के मुकाबले कितना टिक पाता है।



Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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