क्या है Yes Bank? संकट से उभरकर दोबारा भरोसे की राह पर अग्रसर निजी बैंक
2004 में स्थापना से लेकर 2020 के संकट और वर्तमान में विनय एम. टोंसे के नेतृत्व में बैंक के पुनरुद्धार और विस्तार का विस्तृत विश्लेषण।

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में Yes Bank आज एक ऐसे संस्थान के रूप में स्थापित है जिसने तेज़ी से विस्तार, गंभीर संकट और फिर पुनर्निर्माण—तीनों चरणों को बेहद करीब से देखा है। मुंबई मुख्यालय वाला यह निजी क्षेत्र का बैंक रिटेल ग्राहकों, एमएसएमई और कॉरपोरेट सेक्टर को सेवाएं देते हुए देश के सैकड़ों जिलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। 1,100 से अधिक शाखाओं, हजारों एटीएम और बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट आउटलेट्स के व्यापक नेटवर्क के साथ यह बैंक आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से करोड़ों ग्राहकों तक पहुंच बना चुका है।
इस बैंक की शुरुआत वर्ष 2003 में राणा कपूर और अशोक कपूर ने की थी, जब उन्होंने राबो इंडिया फाइनेंस में अपनी हिस्सेदारी बेचकर एक नए निजी बैंक की नींव रखी। 2004 में भारतीय रिजर्व बैंक से बैंकिंग लाइसेंस मिलने के बाद इसी वर्ष अगस्त में इसकी पहली शाखा शुरू हुई, जिसने निजी बैंकिंग क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया। 2005 में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम के जरिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के साथ ही यस बैंक ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया और कुछ ही वर्षों में अपनी पहचान एक तेज़ी से बढ़ते बैंक के रूप में स्थापित कर ली।
विकास के इस दौर में बैंक ने कॉरपोरेट और रिटेल बैंकिंग के साथ-साथ ग्रीन बॉन्ड जैसे नवाचारों के जरिए नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को वित्तपोषित किया, वहीं डिजिटल भुगतान क्षेत्र में ‘Yes Pay’ जैसे प्लेटफॉर्म लॉन्च कर तकनीकी प्रगति को अपनाया। देशभर में 300 से अधिक जिलों और 700 से अधिक शहरों में अपनी मौजूदगी के साथ बैंक ने वित्तीय समावेशन और आधुनिक बैंकिंग सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से फंडिंग और विभिन्न रणनीतिक साझेदारियों ने इसके वैश्विक संपर्क को भी मजबूत किया।
हालांकि, वर्ष 2020 यस बैंक के इतिहास का सबसे चुनौतीपूर्ण समय साबित हुआ, जब पूंजी जुटाने में असफलता, बढ़ते एनपीए और निवेशकों के भरोसे में कमी के कारण इसकी वित्तीय स्थिति कमजोर हो गई। मार्च 2020 में भारतीय रिजर्व बैंक ने हस्तक्षेप करते हुए बैंक पर अस्थायी नियंत्रण स्थापित किया और एक पुनर्गठन योजना लागू की। इस योजना के तहत भारतीय स्टेट बैंक सहित कई बड़े वित्तीय संस्थानों ने पूंजी निवेश कर बैंक को स्थिरता प्रदान की, जिसके बाद यह संकट से बाहर निकल सका और सामान्य बैंकिंग संचालन फिर से शुरू हुआ।
पुनर्गठन के बाद नए प्रबंधन के नेतृत्व में बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार देखने को मिला और 2020 में फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर के जरिए पूंजी जुटाकर इसकी बैलेंस शीट को मजबूत किया गया। आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों जैसे सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन की हिस्सेदारी बढ़ने से बैंक को वैश्विक स्तर पर भी समर्थन मिला। 2026 में विनय एम. टोंसे के नए प्रबंध निदेशक और सीईओ के रूप में नियुक्त होने के साथ बैंक ने स्थिरता और विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाया है।
आज यस बैंक की पहचान केवल एक निजी बैंक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे वित्तीय संस्थान के रूप में बन चुकी है जिसने कठिन परिस्थितियों से उबरकर अपनी विश्वसनीयता को फिर से स्थापित किया है। मजबूत नियामकीय समर्थन, विविध निवेशकों की भागीदारी और तकनीकी नवाचारों के सहारे यह बैंक एक बार फिर भारतीय बैंकिंग परिदृश्य में अपनी जगह मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Pratahkal Bureau
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