भारत और यूरोपीय संघ के करीब आने से क्यों घबराया अमेरिका? जाने भारत का नया गेमचेंजर प्लान
भारत और यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक 'मुक्त व्यापार समझौते' (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे 'सभी समझौतों की जननी' कहा जा रहा है। वैश्विक जीडीपी के 25% हिस्से वाली इस डील से कार, शराब और चॉकलेट सस्ते होंगे। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच यह समझौता अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जानें इस महा-समझौते के सभी महत्वपूर्ण पहलू और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव।

India EU Trade deal : वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के मानचित्र पर मंगलवार को एक ऐसी लकीर खींची गई, जिसने दुनिया की महाशक्तियों के समीकरण बदल दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को यूरोपीय संघ (EU) के साथ उस बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर की पुष्टि की, जिसे विशेषज्ञों द्वारा "सभी समझौतों की जननी" (Mother of all agreements) करार दिया जा रहा है। यह समझौता न केवल दो अरब लोगों का विशाल बाजार तैयार करेगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 25 प्रतिशत हिस्से को एक सूत्र में पिरो देगा।
9 वर्षों का इंतजार खत्म: विश्व व्यापार का नया अध्याय
गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। जून 2022 में नौ वर्षों के अंतराल के बाद फिर से शुरू हुई वार्ताएं अब एक ठोस संधि में बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे "लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता" का प्रतीक बताया है।
भारतीयों के लिए क्या होगा सस्ता ?
इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से भारतीय उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर बड़ा लाभ होने वाला है। संधि के तहत शुल्कों में भारी कटौती प्रस्तावित है:
- यूरोपीय कारें: कारों पर लगने वाला 110% का उच्चतम टैरिफ धीरे-धीरे घटकर मात्र 10% रह जाएगा।
- शराब और खाद्य पदार्थ: शराब पर शुल्क 150% से घटकर 20% पर आएगा। वहीं, पास्ता और चॉकलेट जैसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर वर्तमान 50% टैरिफ को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
- निर्यातकों को संजीवनी: कपड़ा, चमड़ा, रसायन और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को अब बांग्लादेश जैसे देशों से मिलने वाली शुल्क-मुक्त प्रतिस्पर्धा से निजात मिलेगी।
अमेरिकी 'टैरिफ वॉर' का रणनीतिक प्रतिसंतुलन :
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "टैरिफ-प्रधान" नीतियों ने वैश्विक व्यापारिक बाधाएं खड़ी कर दी हैं। जहां अमेरिका ने भारतीय आयात और रूसी तेल खरीद पर भारी जुर्माना और टैरिफ लगाए हैं, वहीं भारत-EU समझौते को एक 'रणनीतिक प्रतिसंतुलन' के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोपीय संघ के 96.6% वस्तुओं के निर्यात पर लगने वाले शुल्क समाप्त होने से यूरोपीय उत्पादों को भारतीय बाजार में विशेषाधिकार प्राप्त पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही, वित्तीय और समुद्री सेवाओं में यूरोपीय प्रदाताओं को बड़ी छूट मिलेगी।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और वैश्विक प्रभाव :
इस घटनाक्रम ने वाशिंगटन में हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत के रूसी तेल व्यापार पर सवाल उठाकर दबाव बनाने की कोशिश की है, लेकिन भारत और यूरोपीय संघ ने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए इतिहास रच दिया है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन के शब्दों में, "हमने दो अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाया है, और यह तो बस शुरुआत है।"
यह संधि वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है, जो आने वाले समय में भारत को एक 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड हब' बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित होगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
