क्यों चुना RBI ने ओडिशा को? सुरक्षा, स्थिरता और स्वदेशी तकनीक के साथ भारत का नया 'फाइनेंशियल बैकबोन' तैयार।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ओडिशा में देश का सबसे सुरक्षित डेटा सेंटर तैयार किया है। भूकंप और सीमा पार के खतरों से दूर, यह डिजिटल भारत की वित्तीय रीढ़ को कैसे सुरक्षित रखेगा? जानिए विस्तार से।

Digital India's impregnable fortress: RBI builds one in Odisha
वित्तीय सुरक्षा का नया अध्याय
नई दिल्ली: डिजिटल युग में किसी भी देश की सबसे बड़ी संपत्ति उसका डेटा होता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारत के वित्तीय बुनियादी ढांचे को भविष्य के खतरों से सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में RBI ने एक अत्याधुनिक और उच्च-सुरक्षा वाला डेटा सेंटर स्थापित किया है। यह केंद्र केवल एक आईटी एसेट नहीं है, बल्कि भारत की वित्तीय स्थिरता का एक मजबूत स्तंभ है।
रणनीतिक स्थान: ओडिशा ही क्यों?
भुवनेश्वर के 'इन्फो वैली-II' (खोरधा) में 18.55 एकड़ के विशाल परिसर में फैले इस डेटा सेंटर का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे तीन बड़े सुरक्षा कारण हैं:
- सीमा पार के खतरों से दूरी: भारत के पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं से दूर होने के कारण, यह स्थान पड़ोसी देशों से होने वाले संभावित मिसाइल या ड्रोन खतरों की पहुंच से काफी बाहर है। इसे एक 'स्ट्रैटेजिक डेप्थ' (रणनीतिक गहराई) वाला क्षेत्र माना जाता है।
- भूकंप का कम जोखिम: हिमालयी बेल्ट या अन्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की तुलना में, ओडिशा का यह हिस्सा 'लो सीस्मिक रिस्क ज़ोन' (कम भूकंपीय जोखिम वाला क्षेत्र) में आता है। इससे प्राकृतिक आपदा की स्थिति में डेटा के नष्ट होने का खतरा न्यूनतम हो जाता है।
- साइबर और नेटवर्क सुरक्षा: मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों के विपरीत, ओडिशा प्रमुख सब-सी (समुद्र के नीचे) संचार केबलों का लैंडिंग पॉइंट नहीं है। भीड़भाड़ वाले डिजिटल ट्रैफिक कॉरिडोर से दूर होने के कारण, यह केंद्र केंद्रित साइबर हमलों और नेटवर्क कमजोरियों से अधिक सुरक्षित है।
विश्व स्तरीय मानक: Tier IV सर्टिफिकेशन
RBI का यह नया केंद्र दुनिया के उच्चतम मानकों पर खरा उतरता है। इसे Tier IV सर्टिफिकेशन प्राप्त है, जिसका मतलब है कि इसमें खराबियों को झेलने की अद्भुत क्षमता (Fault Tolerance) है। यहाँ बिजली, कूलिंग और नेटवर्क के लिए कई बैकअप सिस्टम मौजूद हैं। यदि एक सिस्टम फेल भी हो जाए, तो दूसरा तुरंत काम संभाल लेता है, जिससे बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहती हैं।
क्या काम करेगा यह सेंटर?
यह ग्रीनफील्ड सुविधा RBI के उन महत्वपूर्ण कार्यों को संभालेगी जो पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चलाते हैं:
- करेंसी मैनेजमेंट: देश में नोटों और मुद्रा का प्रबंधन।
- पेमेंट और सेटलमेंट: UPI, RTGS और NEFT जैसे रीयल-टाइम ट्रांजेक्शन की सुरक्षा।
- नियामक डेटा: बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़ा गोपनीय डेटा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का कदम
भारत अब अमेरिका के 'फेडरल रिजर्व बैंक' जैसी सुरक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। जैसे अमेरिका में 'ईस्ट रदरफोर्ड ऑपरेशंस सेंटर' अपनी भुगतान प्रणालियों को सुरक्षित रखता है, वैसे ही RBI ने भुवनेश्वर में यह सुरक्षित और संप्रभु (Sovereign) प्लेटफॉर्म तैयार किया है। नवी मुंबई (खारघर) में स्थित पहले डेटा सेंटर के बाद यह RBI का दूसरा बड़ा केंद्र है।
संसाधनों की प्रचुरता
डेटा सेंटरों को चलाने के लिए ज़मीन, पानी और बिजली की निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता होती है। ओडिशा इन तीनों ही मामलों में समृद्ध है। राज्य की अनुकूल औद्योगिक नीतियों और प्रचुर संसाधनों ने इसे RBI के साथ-साथ SEBI और SBI जैसे संस्थानों के लिए भी एक पसंदीदा ठिकाना बना दिया है।
वित्तीय डेटा को अब 'महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा' माना जाता है। RBI का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदा या साइबर युद्ध जैसी चरम स्थितियों में भी भारत की वित्तीय रीढ़ (Financial Backbone) न टूटे। यह सेंटर आधुनिक भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के प्रति उसकी गंभीरता का एक चमकता हुआ उदाहरण है।

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