व्हाइट हाउस का दबाव बनाम फेड की स्वायत्तता: ब्याज दरों पर नहीं झुके जेरोम पॉवेल, ट्रंप की मांग को किया दरकिनार
फेडरल रिजर्व ने राष्ट्रपति ट्रंप के भारी दबाव के बावजूद ब्याज दरों को 3.5%-3.75% पर स्थिर रखा है। जेरोम पॉवेल ने मुद्रास्फीति और आर्थिक स्थिरता का हवाला देते हुए दरें घटाने से इनकार कर दिया, जिससे व्हाइट हाउस और फेड के बीच टकराव बढ़ गया है। जानें इस फैसले के पीछे के आर्थिक कारण और कानूनी पेच।

वॉशिंगटन: अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच छिड़ा आर्थिक और राजनीतिक संग्राम एक नए चरम पर पहुँच गया है। बुधवार को अपनी साल की पहली महत्वपूर्ण बैठक में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का निर्णय लेते हुए उन्हें 3.5% से 3.75% के स्तर पर स्थिर रखा है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप की उन लगातार अपीलों के बावजूद लिया गया है, जिसमें उन्होंने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए दरों में भारी कटौती की मांग की थी।
प्रमुख घटनाक्रम: सुरक्षा और स्थिरता की प्राथमिकता
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के बाद जारी बयान में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए 'प्रतीक्षा करो और देखो' की नीति अपनाना ही बुद्धिमानी है। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया कि जब तक मुद्रास्फीति (Inflation) उनके 2% के लक्ष्य के करीब नहीं पहुँच जाती, तब तक दरों में और कटौती करना जोखिम भरा हो सकता है।
ट्रंप का प्रहार और फेड की दो-टूक
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर करने में देर नहीं की। उन्होंने फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल को "कठोर" करार देते हुए कहा कि ब्याज दरों में कटौती को दोगुना किया जा सकता था। ट्रंप का तर्क है कि उच्च ब्याज दरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था को "अरबों डॉलर" का नुकसान पहुँचा रही हैं।
दूसरी ओर, जेरोम पॉवेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता का बचाव करते हुए कहा:
"मौद्रिक नीति का निर्धारण सार्वजनिक हित और आर्थिक आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दबाव या डराने-धमकने की रणनीति के तहत।"
समिति के भीतर मतभेद और चुनौतियाँ
फेडरल रिजर्व के भीतर भी राय एकमत नहीं है। 12 सदस्यीय मतदान समिति में इस बार गहरी दरार देखी गई:
- हॉक्स (Hawks): अधिकारियों का एक वर्ग आगे किसी भी कटौती के सख्त खिलाफ है जब तक महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में न आ जाए।
- डोव्स (Doves): कुछ सदस्य, जिनमें ट्रंप द्वारा नियुक्त स्टीफन मिरन और क्रिस्टोफर वालर शामिल हैं, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए दरों में 0.25% की कटौती के पक्ष में थे।
कानूनी और भविष्य के निहितार्थ
यह टकराव केवल बयानों तक सीमित नहीं है। न्याय विभाग द्वारा जेरोम पॉवेल के खिलाफ एक आपराधिक जांच शुरू की गई है, जिसे पॉवेल ने दरें न घटाने के कारण "प्रतिशोध" बताया है। पॉवेल का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है, और बाजार की नजर इस बात पर है कि ट्रंप अपना अगला 'पसंद का' चेयरमैन किसे नियुक्त करते हैं।
वैश्विक बाजारों पर प्रभाव
फेडरल रिजर्व का यह अडिग रुख वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है। यह न केवल अमेरिकी डॉलर की मजबूती को प्रभावित करेगा, बल्कि विकासशील देशों के केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी असर डालेगा। आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के आंकड़े ही यह तय करेंगे कि फेड अपनी "स्वतंत्रता" की इस लड़ाई में कितना सफल रहता है।

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