दुनिया के वित्तीय बाजारों में एक बार फिर सोना और चांदी चर्चा के केंद्र में हैं। बीते वर्ष जिस तेजी के साथ इन कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड बनाए, उसने निवेशकों, उद्योग जगत और नीति-निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 2025 के अंत तक पहुंचते-पहुंचते सोना ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी ने भी अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया। अब 2026 को लेकर बाजार की नजर इस सवाल पर टिकी है कि क्या यह तेजी कायम रहेगी या कीमतें ठहराव और उतार-चढ़ाव के दौर में प्रवेश करेंगी।

सोने की बात करें तो हाल के महीनों में इसकी कीमतें वैश्विक स्तर पर 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गईं। भारतीय बाजार में इसका असर यह रहा कि 10 ग्राम सोने का भाव लगभग 1.42 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया। यह उछाल अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे कई ठोस कारण रहे। वैश्विक स्तर पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की पारंपरिक भूमिका, और केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद ने कीमतों को मजबूत सहारा दिया। इसके साथ ही अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने भी सोने की चमक बढ़ाई।

चांदी ने इस दौरान और भी चौंकाने वाला प्रदर्शन किया। 2025 में इसकी कीमतों में 150 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई और यह 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई। भारतीय बाजार में इसका भाव करीब 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। चांदी की इस तेजी का कारण केवल निवेश मांग नहीं रहा, बल्कि औद्योगिक उपयोग में आई तेजी भी एक बड़ा कारक बनी। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग के साथ-साथ आपूर्ति की सीमाओं ने चांदी की कीमतों को नई ऊंचाई दी।

अब जब बाजार 2026 में प्रवेश कर रहा है, तो विश्लेषकों के आकलन दो धाराओं में बंटे नजर आते हैं। एक वर्ग का मानना है कि सोने की कीमतों में आगे भी मजबूती बनी रह सकती है। सुरक्षित निवेश की मांग, केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीद और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते सोना 2026 में भी ऊंचे स्तरों पर टिक सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ अपेक्षाकृत संतुलित दृष्टिकोण रखते हैं और मानते हैं कि इतनी तेज बढ़त के बाद कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव या हल्की बढ़त देखने को मिल सकती है।

चांदी के लिए 2026 का परिदृश्य और भी दिलचस्प माना जा रहा है। औद्योगिक मांग के चलते इसमें आगे भी तेजी की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इसकी प्रकृति अधिक अस्थिर मानी जाती है। यानी तेजी के साथ-साथ तेज गिरावट की आशंका भी बनी रहती है। यही कारण है कि निवेशक इसे उच्च जोखिम और उच्च प्रतिफल वाले विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

इन दोनों धातुओं की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में वैश्विक ब्याज दरों की दिशा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी, भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक मांग की रफ्तार शामिल हैं। 2026 में इन कारकों की चाल ही यह तय करेगी कि सोना-चांदी अपनी चमक बनाए रखते हैं या बाजार में नया संतुलन बनता है। सोना और चांदी केवल निवेश साधन नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक हालात का प्रतिबिंब भी हैं। 2026 में इनकी कीमतों की दिशा न केवल निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि दुनिया किस तरह के आर्थिक और राजनीतिक दौर से गुजर रही है।

Updated On
Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story