नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्विक मंच पर बढ़ते दबदबे और मजबूत घरेलू नीतियों के चलते देश में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के पारंपरिक पैटर्न में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव दर्ज किया गया है। वैश्विक कॉर्पोरेट जगत और बड़ी वित्तीय कंपनियों द्वारा भारत में पूंजी लगाने की रणनीतियों में आए इस बुनियादी बदलाव के बीच अमेरिका अब देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के आर्थिक आंकड़ों ने इस बात की पुष्टि की है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने टैक्स-फ्रेंडली माने जाने वाले देशों (टैक्स हेवन) के रास्ते फंड रूट करने की पुरानी परिपाटी को छोड़ दिया है और अब वे सीधे भारतीय बाजार में मुख्य इक्विटी निवेश को तरजीह दे रही हैं। इसी रणनीतिक बदलाव के चलते बीते वित्त वर्ष में अमेरिका से आने वाला इक्विटी निवेश करीब दोगुने से भी अधिक बढ़कर 11 अरब डॉलर के पार पहुंच गया, जिसने लंबे समय से शीर्ष पर रहने वाले मॉरीशस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया है।

भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के हालिया आधिकारिक बयानों के अनुसार, वैश्विक निवेशकों का यह भरोसा केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सार्वजनिक मंचों पर इस बात को साझा किया था कि प्रमुख अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं को देखते हुए हाल के महीनों में लगभग 60 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, इस पूरे बदलाव के बावजूद भारत में कुल एफडीआई प्रवाह के मामले में सिंगापुर अभी भी पहले स्थान पर मजबूती से काबिज है। मॉरीशस के साथ भारत की कर संधि (टैक्स ट्रीटी) में हुए महत्वपूर्ण संशोधनों के बाद से विदेशी कंपनियों के लिए सिंगापुर सबसे पसंदीदा और विश्वसनीय रूट बनकर उभरा है। यही कारण है कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश में आए कुल इक्विटी प्रवाह में अकेले सिंगापुर की हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई दर्ज की गई है। इसके साथ ही वित्तीय सेवा क्षेत्र में हुए बड़े पूंजीगत सौदों के चलते जापान से आने वाले निवेश में भी अप्रत्याशित तेजी देखी गई है।

दूसरी ओर, बाजार विश्लेषकों और सरकारी अधिकारियों का मानना है कि निवेशक टैक्स हेवन देशों को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं कर रहे हैं, जिसका प्रमाण केमैन आइलैंड्स से होने वाले निवेश प्रवाह में दिखा है। केमैन आइलैंड्स से भारत में होने वाला निवेश वर्ष 2024-25 के 371 मिलियन डॉलर से बढ़कर पिछले साल सीधे 2.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, केंद्रीय वित्तीय नियामक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि किसी दीर्घकालिक ट्रेंड का हिस्सा नहीं है, बल्कि कुछ गिने-चुने बड़े संस्थागत निवेशों और विशेष सौदों के कारण अचानक आई एक अस्थायी उछाल है।

इसके साथ ही, पिछले वित्त वर्ष के दौरान एफडीआई के सेक्टोरल आवंटन यानी विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले पूंजीगत वितरण में भी क्रांतिकारी बदलाव देखा गया है। कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षेत्र इस बार पारंपरिक सेवा क्षेत्र (सर्विसेज सेक्टर) को पछाड़कर निवेश के मामले में शीर्ष पायदान पर पहुंच गया है। इस अभूतपूर्व वृद्धि की मुख्य वजह भारत में बड़े पैमाने पर स्थापित हो रहे डेटा सेंटर्स में होने वाली विदेशी पूंजी की भारी आमद है। इसके अलावा देश के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में भी घरेलू मांग की मजबूती और अनुकूल सरकारी प्रोत्साहन नीतियों के कारण इक्विटी निवेश में पांच गुना से अधिक का उछाल आया है। वहीं, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार के प्रयासों के चलते सी ट्रांसपोर्ट और शिपिंग सेक्टर में करीब 2 अरब डॉलर के निवेश के साथ 30 गुना की रिकॉर्ड ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस आर्थिक प्रगति और बदलते निवेश पैटर्न की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार देश के भीतर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और निवेश अनुकूल माहौल को मजबूत करने के लिए कई नए नीतिगत प्रस्तावों पर काम कर रही है। उन्होंने रणनीतिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से कहा कि सरकार उन क्षेत्रों की चुनौतियों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित कर रही है जहां हमारी मुख्य सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) गंभीर रूप से कुछ खास भौगोलिक क्षेत्रों या गिने-चुने देशों पर अत्यधिक निर्भर है। सरकार का यह कदम भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखने और विदेशी पूंजी के प्रवाह को निरंतर बनाए रखने में बेहद निर्णायक साबित होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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