आम आदमी को राहत नहीं! अमेरिकी फेड ने लगातार तीसरी बार झटका दिया, ब्याज दरों में कटौती का इंतजार और बढ़ा।
महंगाई और ईरान युद्ध के दबाव के बीच फेड ने लगातार तीसरी बार दरों को यथावत रखा, जेरोम पॉवेल के बाद केविन वॉर्श संभाल सकते हैं कमान।

वाशिंगटन डीसी स्थित फेडरल रिजर्व का मुख्यालय और चेयरमैन जेरोम पॉवेल जो ब्याज दरों पर नीतिगत निर्णय ले रहे हैं।
वाशिंगटन डीसी से आई एक बड़ी आर्थिक खबर ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज कर दी है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अपनी बहुप्रतीक्षित नीतिगत बैठक के बाद बेंचमार्क ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया है। वर्ष 2026 में यह लगातार तीसरी बार है जब फेडरल रिजर्व ने दरों में कोई छेड़छाड़ नहीं की है। यह फैसला एक ऐसे समय में लिया गया है जब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ईरान युद्ध के भू-राजनीतिक तनाव और नौकरियों के बाजार में अस्थिरता के साथ-साथ आसमान छूती महंगाई से जूझ रही है। वैश्विक निवेशकों की नजरें इस बैठक पर टिकी थीं और फेड के इस कदम ने फिलहाल अनिश्चितता के बादलों को कुछ हद तक साफ कर दिया है।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने फेडरल फंड्स रेट को उसकी मौजूदा सीमा 3.5% से 3.75% पर ही स्थिर बनाए रखा है। गौरतलब है कि यह वही दर है जो वाणिज्यिक बैंक अल्पावधि ऋणों के लिए एक-दूसरे से वसूलते हैं, और इसका सीधा असर वैश्विक ऋण लागतों पर पड़ता है। बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों को इस स्थिरता की पहले से ही प्रबल उम्मीद थी। सीएमई फेडवॉच टूल (CME FedWatch Tool) ने भी शत-प्रतिशत संभावना जताई थी कि नीति निर्माता मौजूदा दरों को ही बनाए रखेंगे। अमेरिका में पिछले महीने महंगाई दर लगभग दो साल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसने फेड के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर दिया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दरें स्थिर रखकर केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि किसी भी प्रकार की कटौती आग में घी डालने का काम कर सकती है।
यह बैठक ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि यह फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के कार्यकाल की अंतिम बैठक थी। आठ वर्षों तक वैश्विक अर्थव्यवस्था की धुरी संभालने के बाद पॉवेल आगामी 15 मई को अपने पद से सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके कार्यकाल का अंत एक ऐसे मोड़ पर हो रहा है जहां उनके उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। बुधवार को ही सीनेट बैंकिंग कमेटी ने केविन वॉर्श के नामांकन को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया। वॉर्श को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेड का नेतृत्व करने के लिए चुना है, जिससे वह अगले महीने पॉवेल की कमान संभालने के एक कदम और करीब पहुंच गए हैं।
केविन वॉर्श के सामने चुनौतियों का एक विशाल अंबार होगा। एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से ब्याज दरें कम करने का निरंतर राजनीतिक दबाव है, तो दूसरी तरफ अनियंत्रित होती महंगाई की जमीनी हकीकत। राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क रहा है कि कम दरों से आर्थिक विकास को गति मिलेगी, लेकिन फेड की स्वायत्तता और महंगाई पर नियंत्रण के बीच संतुलन बिठाना वॉर्श के लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। कई शीर्ष अर्थशास्त्री अब यह अनुमान लगाने लगे हैं कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए फेड वर्ष 2026 के अंत या शायद 2027 तक भी ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेगा।
इस फैसले का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए भी यह संदेश है कि वैश्विक स्तर पर 'महंगा कर्ज' अभी कुछ और समय तक बना रहेगा। जब तक अमेरिकी फेड दरों में कटौती शुरू नहीं करता, तब तक दुनिया भर के अन्य केंद्रीय बैंकों के लिए अपनी नीतिगत दरों को कम करना जोखिम भरा हो सकता है। अंततः, जेरोम पॉवेल की विदाई और नए नेतृत्व के आगमन के बीच, वैश्विक अर्थव्यवस्था एक 'इंतजार करो और देखो' की स्थिति में है, जहां हर कदम का असर करोड़ों लोगों की बचत और निवेश पर पड़ना निश्चित है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
