UPI के 10 साल बेमिसाल; लेनदेन में 12,000% की दर्ज हुई ऐतिहासिक वृद्धि
UPI के 10 साल: लेनदेन में 12,000 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि! जानें कैसे एक दशक में डिजिटल पेमेंट ने बदली भारत की अर्थव्यवस्था और मार्च 2026 के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े।

स्मार्टफोन की स्क्रीन पर यूपीआई का लोगो और पीछे नीले रंग का डिजिटल ग्लोबल मैप।
UPI transaction growth India : भारत की वित्तीय तस्वीर को पूरी तरह बदल देने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने 11 अप्रैल को अपने गौरवशाली सफर के दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। साल 2016 में एक छोटे से प्रयोग के तौर पर शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म आज भारतीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा बन चुका है। पिछले एक दशक में UPI की विकास दर किसी चमत्कार से कम नहीं रही है, जहाँ इसके लेनदेन की मात्रा (वॉल्यूम) में 12,000 गुना से भी अधिक का ऐतिहासिक इजाफा दर्ज किया गया है, वहीं लेनदेन की कुल वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की भारी बढ़ोत्तरी हुई है। यह केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत के आम आदमी के डिजिटल सशक्तिकरण की एक वैश्विक गाथा है।
एनालिटिक्स फर्म ट्रैक्सन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 UPI के लिए रिकॉर्डतोड़ रहा, जिसमें कुल 218.98 अरब लेनदेन दर्ज किए गए। इन लेनदेन का कुल मूल्य 285 लाख करोड़ रुपये रहा, जो भारत की बढ़ती डिजिटल क्रय शक्ति का प्रमाण है। यदि हम इसके शुरुआती सफर पर नजर डालें, तो वित्त वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा मात्र 1.786 करोड़ लेनदेन पर सिमटा था, जिसकी कुल वैल्यू 6,952 करोड़ रुपये थी। शुरुआती वर्षों की धीमी शुरुआत के बाद, वित्त वर्ष 2019-20 वह निर्णायक समय था जब UPI ने मुख्यधारा में अपनी जगह बनाई और 12.52 अरब लेनदेन के जादुई आंकड़े को छुआ। इसके बाद वैश्विक महामारी के दौरान जब दुनिया ठहर सी गई थी, तब सुरक्षित और संपर्क रहित भुगतान के रूप में UPI ने अपनी गति को दोगुना कर लिया।
बाजार में व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच UPI की स्वीकार्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2025 तक देश में UPI क्यूआर कोड की संख्या 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 73.13 करोड़ तक पहुंच गई है। केवल गलियों की छोटी दुकानों पर ही नहीं, बल्कि बड़े शोरूमों में भी पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनलों की संख्या बढ़कर 1.148 करोड़ हो गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों ने इस सफलता पर मुहर लगाते हुए बताया कि मार्च 2026 में UPI ने अपने अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया। मार्च के महीने में कुल 22.64 अरब लेनदेन प्रोसेस किए गए, जो पिछले सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने के लिए काफी थे।
सफलता का यह सफर रुकने वाला नहीं है। वित्त वर्ष 2022-23 में 83.75 अरब और वित्त वर्ष 2024-25 में 185.87 अरब लेनदेन दर्ज करने के बाद, अब UPI वैश्विक स्तर पर भारत की 'सॉफ्ट पावर' बनकर उभरा है। भुगतान की इस सुगमता ने न केवल बैंकिंग सिस्टम पर बोझ कम किया है, बल्कि नकदी पर निर्भरता को कम कर पारदर्शिता को भी बढ़ावा दिया है। 10 साल पहले शुरू हुई यह डिजिटल लहर आज एक सुनामी का रूप ले चुकी है, जो आने वाले समय में भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में दुनिया का निर्विवाद नेता बनाने के लिए तैयार है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
