कभी अरब में चलता था भारत का रुपया; जाने Gulf Rupee की अनसुनी कहानी
कभी अरब देशों में हावी रहा भारतीय रुपया, कैसे गल्फ रुपया आया और आखिरकार 1970 तक क्यों बंद हुआ। जानिए स्मगलिंग, डीवैल्युएशन और खाड़ी देशों की स्वतंत्र मौद्रिक नीतियों के कारण भारतीय रुपए की यात्रा और इसका ऐतिहासिक महत्व।

Gulf Rupee history
Gulf Rupee history : काफी कम लोग जानते हैं कि कभी भारतीय रुपया खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता था। कुवैत, बहरीन, कतर और यूएई जैसे देशों में भारतीय रुपए का ही लेन-देन होता था, जिससे यह मुद्रा दशकों तक क्षेत्र में व्यापार और अन्य वित्तीय गतिविधियों की रीढ़ बनी रही।
भारतीय रुपया इस क्षेत्र में इसलिए हावी था क्योंकि अधिकांश खाड़ी देश ब्रिटिश प्रशासन के तहत भारत के साथ व्यापक व्यापार में जुड़े हुए थे और उनके पास कोई स्वतंत्र मौद्रिक प्रणाली नहीं थी। भारतीय रुपया स्थिर, भरोसेमंद और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए आसान होने के कारण खाड़ी व्यापारियों की प्राथमिक मुद्रा बन गया।
हालांकि, इसके साथ ही एक समस्या भी उभरी। अरब देशों में सोना सस्ता होने के कारण व्यापारी भारतीय रुपए का उपयोग करके सोना खरीदकर भारत में मुनाफे के लिए स्मगलिंग करने लगे। इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा और वित्तीय संकट उत्पन्न हुआ। इस समस्या से निपटने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1959 में गल्फ रुपया जारी किया। यह नया नोट अलग रंग में छपा और केवल खाड़ी देशों में ही वैध था, ताकि इसे भारत में एक्सचेंज न किया जा सके और स्मगलिंग रोकी जा सके।
1966 में भारत ने अपने रुपए का 57% डीवैल्युएशन किया, जिससे गल्फ रुपए की मूल्य भी गिर गई। इस कारण खाड़ी देशों की बचत, सैलरी और रिज़र्व में तुरंत नुकसान हुआ। डीवैल्युएशन के बाद खाड़ी देशों ने तय किया कि अब वे भारत के आर्थिक निर्णयों से अपनी मुद्रा प्रभावित नहीं होने देंगे और अपनी स्वतंत्र मौद्रिक प्रणाली तैयार की।
1966 और 1970 के बीच कुवैत, बहरीन, कतर और यूएई ने भारतीय रुपए की जगह अपनी स्वयं की करेंसी—कुवैती दीनार, बहरीनी दीनार, कतरी रियाल और यूएई दिरहम—जारी की। ओमान ने 1970 तक भारतीय रुपए का इस्तेमाल जारी रखा और फिर ओमानी रियाल अपनाया। इस प्रकार, कभी विदेशी व्यापार और वित्तीय गतिविधियों में प्रमुख भूमिका निभाने वाला भारतीय रुपया खाड़ी देशों में पूरी तरह समाप्त हो गया, लेकिन यह इतिहास आज भी भारत और खाड़ी देशों के आर्थिक रिश्तों की महत्वपूर्ण यादगार के रूप में मौजूद है।
- Gulf Rupee historyIndia rupee in Arab countriesgulf rupee kyu band huaGulf rupee ka safarkoweit Bahrain UAE rupee historyIndia currency in Middle EastGulf Rupee vs Indian rupee1959 Gulf rupee launchArab countries rupee problemIndia RBI Gulf rupeeGulf countries own currencyKuwaiti Dinar introductionBahraini Dinar historyQatar Riyal startUAE Dirham historyOman Rial adoptionIndia currency abroadGulf rupee smuggling1966 India rupee devaluationIndian rupee in GulfGulf rupee endIndian rupee foreign exchange crisisPratahkal DailyPratahkal NewsIndia

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
