Ola food delivery Stop: ओला के उपभोक्ता व्यवसाय में अचानक आई यह चुपचाप हलचल पूरे उद्योग का ध्यान खींच रही है। राइड-हेलिंग से आगे अनेक प्रयोगों की कोशिशों के बीच, कंपनी ने ओला फूड्स का परिचालन अस्थायी तौर पर रोक दिया है। हाल के दिनों में ओला ऐप से फूड डिलीवरी सेक्शन पूरी तरह हट चुका है, जबकि ओएनडीसी प्लेटफॉर्म पर इसके क्लाउड-किचन भी ऑर्डर स्वीकार नहीं कर रहे हैं। मामले से परिचित सूत्रों का कहना है कि कंपनी अपने व्यवसायिक ढांचे का पुनर्मूल्यांकन कर रही है और आगे की रणनीति पर नए सिरे से काम चल रहा है।


ओला के इस निर्णय ने विशेषज्ञों और उपयोगकर्ताओं दोनों में सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह केवल अस्थायी रोक है या कंपनी अब इस श्रेणी से पूरी तरह बाहर निकलने की तैयारी में है। ओला कंज्यूमर की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। कंपनी से प्रतिक्रिया मिलते ही संबंधित अपडेट जारी किया जाएगा।


यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सॉफ्टबैंक समर्थित फर्म अपने गैर-प्रमुख व्यवसायों का बड़े पैमाने पर पुनर्गठन कर रही है। पिछले दो वर्षों में ओला ने अपने मुख्य मोबिलिटी व्यवसाय के बाहर कई प्रयोग या तो बंद कर दिए हैं या छोटा कर दिए हैं। प्रयुक्त कारों के कारोबार ओला कार्स और त्वरित वाणिज्य मॉडल ओला डैश को भी पहले ही चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया गया था। उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि कंपनी ने इन प्रोजेक्ट्स पर “कार्य रोक दिया” है और अधिकतर गतिविधियाँ थम चुकी हैं।


ओला फूड्स की कहानी भी प्रयोगों और लगातार चुनौतियों से भरी रही है। 2015 के शुरुआती प्रयासों के बाद कंपनी ने 2019 में क्लाउड-किचन मॉडल के साथ ओला फूड्स लॉन्च किया। इस मॉडल में इन-हाउस ब्रांड और ओला के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के जरिए डिलीवरी शामिल थी। लेकिन सेवा बड़े पैमाने पर तेजी नहीं पकड़ सकी। कंपनी का नवीनतम प्रयास सितंबर 2023 में तब शुरू हुआ जब ओएनडीसी के साथ साझेदारी कर ओला ने अपने प्रमुख ऐप से ही फूड डिलीवरी सेवाएँ प्रदान करने का फैसला किया। दिसंबर 2024 तक इस सेवा का विस्तार 100 शहरों तक हो चुका था और ओला का उद्देश्य था कि केवल अपने ऐप पर निर्भर रहे बिना वितरण नेटवर्क को चौड़ा किया जाए।


इसके बावजूद, संचालन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ओएनडीसी नेटवर्क पर ऑर्डर वॉल्यूम अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। वहीं भारतीय फूड डिलीवरी और क्लाउड-किचन क्षेत्र में स्विगी, जोमैटो और ओएनडीसी विक्रेताओं का वर्चस्व पहले से ही बेहद मजबूत है, जिससे छोटे या गैर-केन्द्रित खिलाड़ियों के लिए टिके रहना चुनौतीपूर्ण हो चुका है। इसी बीच रैपिडो ने अगस्त 2025 में अपना स्टैंडअलोन फूड डिलीवरी ऐप ‘ओनली’ लॉन्च कर प्रतिस्पर्धा को और तेज़ कर दिया है।


ओला द्वारा फूड डिलीवरी ऑपरेशन रोकने का यह कदम न सिर्फ कंपनी के व्यवसाय पुनर्गठन की दिशा को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय फूड टेक मार्केट में प्रतिस्पर्धा किस हद तक सघन हो चुकी है। अब उद्योग की नजर इस बात पर है कि ओला अगला कदम क्या उठाती है—क्या कंपनी नई रणनीति के साथ वापसी करेगी या यह प्रयोग भी उसके गैर-प्रमुख कारोबारों की सूची में हमेशा के लिए शामिल हो जाएगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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