हैदराबाद के एक लोकप्रिय बिरयानी रेस्टोरेंट पर की गई एक साधारण कर-अनुपालन जांच ने ऐसा खुलासा किया, जिसने देशभर के रेस्तरां कारोबार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आयकर विभाग की हैदराबाद इकाई द्वारा शुरू की गई यह कार्रवाई धीरे-धीरे एक ऐसे विशाल कर-चोरी नेटवर्क तक जा पहुँची, जिसका अनुमानित दायरा ₹70,000 करोड़ से अधिक बताया जा रहा है।


जांच की शुरुआत: जब आंकड़ों ने कहानी कहनी शुरू की

आयकर विभाग ने कुछ प्रमुख बिरयानी श्रृंखलाओं के वित्तीय दस्तावेजों में असामान्य पैटर्न देखे। शुरुआती सर्वेक्षण के दौरान अधिकारियों ने वास्तविक बिक्री गतिविधियों जैसे ग्राहकों की संख्या, रसीदें, पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) डेटा और भुगतान प्रवाह की तुलना कर प्राधिकरणों को घोषित किए गए टर्नओवर से की। इस तुलनात्मक अध्ययन में गंभीर विसंगतियाँ सामने आईं। जहां रेस्टोरेंट में ग्राहकों की भारी आवाजाही और डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड दिख रहा था, वहीं दाखिल किए गए जीएसटी और आयकर रिटर्न में कम बिक्री दर्शाई गई थी। यही असंगति आगे की गहन जांच का आधार बनी।


डिजिटल बिलिंग सॉफ्टवेयर: पारदर्शिता का माध्यम या हेरफेर का औज़ार?

जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि देशभर के एक लाख से अधिक रेस्टोरेंट्स द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक व्यापक बिलिंग सॉफ्टवेयर इस पूरे प्रकरण के केंद्र में है। रेस्टोरेंट संचालक अपनी आंतरिक निगरानी के लिए नकद, कार्ड और यूपीआई सहित सभी लेनदेन इस सॉफ्टवेयर में दर्ज करते थे। किंतु आरोप है कि जीएसटी और आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले कई स्थानों पर नकद बिक्री से संबंधित प्रविष्टियों को चुनिंदा रूप से हटा दिया जाता था या उनमें बदलाव कर दिया जाता था। कुछ मामलों में तो “बल्क डिलीट” जैसी सुविधाओं का उपयोग कर पूरे दिन या सप्ताह की बिलिंग फाइलें ही मिटा दी गईं, जिससे वास्तविक बिक्री का बड़ा हिस्सा कर रिकॉर्ड से गायब हो गया।

60 टेराबाइट डेटा और 1.77 लाख आईडी: डिजिटल फोरेंसिक की बड़ी कार्रवाई

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, अधिकारियों ने संबंधित बिलिंग सॉफ्टवेयर प्रदाता के सर्वर तक बैकएंड पहुंच प्राप्त की। इसके बाद लगभग 60 टेराबाइट ट्रांजैक्शनल डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें 1.77 लाख से अधिक रेस्टोरेंट आईडी शामिल थीं। इस व्यापक डेटा विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत डेटा एनालिटिक्स टूल्स की मदद ली गई। बिलिंग रिकॉर्ड को जीएसटी फाइलिंग, पैन डेटा और अन्य सार्वजनिक व वित्तीय स्रोतों से जोड़ा गया। विशेषज्ञों के अनुसार, एआई आधारित एल्गोरिद्म ने उन पैटर्न्स को चिन्हित किया जहां नकद प्रविष्टियाँ संदिग्ध रूप से गायब थीं, जबकि कार्ड और यूपीआई लेनदेन का डेटा बरकरार था। इससे छिपाई गई बिक्री का अनुमान लगाने में निर्णायक मदद मिली।


प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वर्ष 2019-20 से लेकर अब तक संबंधित सॉफ्टवेयर का उपयोग करने वाले रेस्टोरेंट्स द्वारा लगभग ₹70,000 करोड़ की बिक्री दबाए जाने का अनुमान है। जांच में सामने आए प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • ₹13,000 करोड़ से अधिक की डिलीट की गई चालानों की डिजिटल पहचान हो चुकी है।
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के चयनित आउटलेट्स पर भौतिक सत्यापन में लगभग ₹400 करोड़ की अघोषित बिक्री सामने आई।

यह ध्यान देने योग्य है कि ₹70,000 करोड़ दबाई गई बिक्री का अनुमान है, न कि प्रत्यक्ष कर हानि का। वास्तविक कर देयता, जुर्माने और ब्याज की गणना आगे की कानूनी प्रक्रिया में तय होगी।


कर-चोरी का कथित तरीका: कैसे की गई हेरफेर?

जांच में सामने आए कथित तरीकों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है:

  • चयनात्मक डिलीशन – नकद बिक्री दर्ज करने के बाद उन्हें बाद में हटा दिया गया, जिससे घोषित आय कम हो गई।
  • बल्क रिकॉर्ड हटाना – पूरे दिन या सप्ताह की बिलिंग फाइलें मिटा दी गईं।
  • अंडर-रिपोर्टिंग – कुछ मामलों में बिलिंग रिकॉर्ड मौजूद होने के बावजूद रिटर्न में कम आंकड़े दाखिल किए गए।

विश्लेषण में कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में उल्लेखनीय बिक्री-दमन के संकेत मिले हैं। कई राज्यों में यह आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचता दिखाई देता है।


एआई की भूमिका: पारंपरिक ऑडिट से आगे:

पारंपरिक कर-जांच आमतौर पर सैंपलिंग और कागजी रिकॉर्ड पर आधारित होती है। लेकिन इस मामले में विशाल डिजिटल डेटा के विश्लेषण ने जांच की दिशा ही बदल दी। एआई और बिग-डेटा एनालिटिक्स ने न केवल बड़े पैमाने पर डेटा को तेजी से संसाधित किया, बल्कि उन छिपे हुए पैटर्न्स को भी उजागर किया जो सामान्य ऑडिट में पकड़ में आना मुश्किल होते।


आयकर और जीएसटी विभाग अब संबंधित इकाइयों को नोटिस जारी करने, कर वसूली, जुर्माना निर्धारण और संभावित अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। जांच का दायरा अन्य बिलिंग प्लेटफॉर्म और नेटवर्क तक भी विस्तारित किया जा सकता है। हैदराबाद की एक सामान्य अनुपालन जांच से शुरू हुई यह कार्रवाई अब देश के रेस्तरां उद्योग में डिजिटल पारदर्शिता, कर-अनुशासन और तकनीकी जवाबदेही पर व्यापक बहस का कारण बन गई है। ₹70,000 करोड़ के अनुमानित दमन ने यह संकेत दिया है कि डिजिटल युग में पारदर्शिता के उपकरणों का दुरुपयोग भी उतना ही संगठित हो सकता है और उसे उजागर करने के लिए तकनीक ही सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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