टाटा ग्रुप में घमासान: वेणु श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट्स के खिलाफ खोला मोर्चा, चैरिटी कमिश्नर से तुरंत जांच की मांग|
वेणु श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर टाटा ट्रस्ट्स के कामकाज और गवर्नेंस की तुरंत जांच की मांग की है।

टाटा ग्रुप के मामलों को लेकर वेणु श्रीनिवासन द्वारा चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखने के संदर्भ में टाटा का लोगो दिखाई दे रहा है।
देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानों में शुमार टाटा ग्रुप में मतभेद लगातार बढ़ते जा रहे हैं, और अब वेणु श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वेणु श्रीनिवासन, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी होने के साथ-साथ टाटा संस बोर्ड में उनके ज्वाइंट नॉमिनी डायरेक्टर भी हैं। टाटा संस की लिस्टिंग के विकल्पों को लेकर टाटा ग्रुप के भीतर घमासान मचा हुआ है।
चैलिटी कमिश्नर को लिखी चिट्ठी टाटा ग्रुप की दिक्कतें तब और बढ़ गईं जब वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को एक पत्र लिखकर टाटा ट्रस्ट्स के कामकाज और गवर्नेंस की तुरंत जांच करने की मांग की। इस पत्र में श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट्स में गवर्नेंस की गंभीर कमियों का आरोप लगाया है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि एक चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके ट्रस्टी टाटा संस के कमर्शियल मामलों में किस तरह भागीदारी कर रहे हैं।
श्रीनिवासन ने अपने पत्र में नोएल टाटा को हमेशा के लिए ट्रस्टी बनाए रखने पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर नोएल टाटा की नियुक्ति का आधार क्या है। ट्रस्ट में नोएल टाटा के बेटे नेविल की नियुक्ति और खुद नोएल टाटा द्वारा फैसले लेने की प्रक्रिया से खुद को बाहर रखने के मामले पर भी सवाल उठाए गए हैं।
टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी और नियंत्रण टाटा संस इस ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है, जिसमें टाटा ट्रस्ट्स के पास कुल 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसमें से सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के पास 27.98% और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के पास 23.56% हिस्सेदारी है। इन दोनों ट्रस्टों के पास कुल मिलाकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है। वर्तमान में टाटा संस का बोर्ड कंपनी की लिस्टिंग के पक्ष में है, जबकि टाटा ट्रस्ट्स इसे एक प्राइवेट कंपनी ही बनाए रखना चाहता है।
वेणु श्रीनिवासन ने अपनी आपत्ति में कहा है कि SDTT एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, और टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी होने के बावजूद इसे किसी कमर्शियल कंपनी की तरह काम करने या टाटा संस के बिजनेस मामलों में सीधे तौर पर शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
बिजनेस मामलों में दखल पर चिंता श्रीनिवासन की मुख्य चिंता टाटा संस के बिजनेस फैसलों में टाटा ट्रस्ट्स की बढ़ती भागीदारी को लेकर है। उन्होंने 17 सितंबर को टाटा संस की लिस्टिंग के विकल्पों पर विचार करने वाले ट्रस्ट्स के बयान और शापूरजी पलोनजी ग्रुप को लिक्विडिटी देने के नोएल टाटा के प्रस्ताव का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट्स ने टाटा संस से जुड़े बड़े कमर्शियल लेन-देन की पहचान करने, उनसे बातचीत करने और उन्हें लागू कराने में सीधी भूमिका अपना ली है।
पत्र में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि ऐसी भागीदारी SDTT के चैरिटेबल उद्देश्यों के खिलाफ है, जिससे इसके टैक्स-फ्री स्टेटस और चैरिटेबल फंड को बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
कानूनी और गवर्नेंस से जुड़े अन्य पहलू इससे पहले मई महीने में महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने लाइफ ट्रस्टी से जुड़े गवर्नेंस नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बाद SRTT को मीटिंग में शामिल होने या फैसले लेने से रोक दिया था। इस पूरे घटनाक्रम पर जब चैरिटी कमिश्नर को ईमेल भेजा गया, तो उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, और नोएल टाटा ने भी इन सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है।
वेणु श्रीनिवासन ने इनकम टैक्स एक्ट के उन प्रावधानों का भी हवाला दिया है जो रजिस्टर्ड नॉन-प्रॉफिट संगठनों की कमर्शियल गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि नियमों का किसी भी प्रकार का उल्लंघन ट्रस्ट का टैक्स रजिस्ट्रेशन रद्द करवा सकता है। चूंकि टाटा संस में SDTT की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है, इसलिए इसके वित्तीय परिणाम ट्रस्ट और उसके चैरिटेबल फंड्स के लिए बहुत भारी पड़ सकते हैं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
