क्या टाटा कंपनी ₹25,600 करोड़ जुटाने के लिए ले रही है लोन ? जानें क्या है असली वजह
चीन में लग्जरी कारों की कमजोर मांग और साइबर हमले के नुकसान से उबरने व पुराना कर्ज चुकाने के लिए जगुआर लैंड रोवर अंतरराष्ट्रीय बैंकों से 2 अरब पाउंड का कर्ज लेगी।

मुंबई में स्थित टाटा समूह का आधिकारिक लोगो बोर्ड; कंपनी की ब्रिटिश यूनिट जगुआर लैंड रोवर (JLR) वैश्विक मंदी और साइबर अटैक के बाद अपने पुराने ऋण को रीफाइनेंस करने के लिए पांच अंतरराष्ट्रीय बैंकों से 2 अरब पाउंड जुटा रही है।
Tata Group JLR Loan, JLR loan from 5 banks : भारत के सबसे प्रतिष्ठित और सबसे बड़े औद्योगिक साम्राज्य टाटा ग्रुप से एक ऐसी बड़ी खबर सामने आ रही है जिसने ऑटोमोबाइल जगत को चौंका दिया है। टाटा मोटर्स की रीढ़ माने जाने वाली ब्रिटिश लग्जरी कार यूनिट, जगुआर लैंड रोवर (JLR) इस समय एक अभूतपूर्व वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। कभी टाटा ग्रुप के मुनाफे का सबसे मजबूत इंजन रही यह कंपनी अब अपने पुराने कर्जों को चुकाने के लिए विदेशी बैंकों के दरवाजे पर दस्तक देने को मजबूर हो गई है। वैश्विक बाजार में पैदा हुए हालातों और चीन की चाल ने दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी जेएलआर को ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है, जहां उसे अपनी साख बचाने के लिए करीब 2.56 लाख करोड़ रुपये (2 अरब पाउंड) का एक विशालकाय लोन लेना पड़ रहा है।
इस पूरे संकट की कहानी को समझने के लिए हमें उस वैश्विक चक्रव्यूह को देखना होगा जिसने जेएलआर को चारों तरफ से घेर लिया है। कंपनी के लिए दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे मुनाफे वाला बाजार 'चीन' माना जाता रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से चीनी बाजार में आई भीषण आर्थिक मंदी ने जेएलआर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। चीन में लग्जरी कारों की मांग में आई भारी गिरावट के कारण जेएलआर की बिक्री का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। रही-सही कसर अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ और पिछले साल सितंबर में हुए एक बड़े साइबर हमले ने पूरी कर दी। इस रहस्यमयी और बड़े साइबर अटैक के कारण कंपनी का प्रोडक्शन कई हफ्तों तक पूरी तरह ठप रहा, जिससे कंपनी की कमर टूट गई। इन तीनतरफा थपेड़ों का नतीजा यह हुआ कि जो कंपनी एक साल पहले 2.5 अरब पाउंड का भारी-भरकम मुनाफा कमा रही थी, उसका शुद्ध लाभ पिछले फाइनेंशियल ईयर में जमींदोज होकर महज 14 मिलियन पाउंड पर सिमट गया।
वित्तीय मोर्चे पर आए इस भूचाल के बाद अब कंपनी के सामने अगले साल की शुरुआत में पुराने कर्ज की अदायगी करने की बड़ी चुनौती खड़ी है। इसे रीफाइनेंस करने के लिए जेएलआर अब दुनिया के पांच दिग्गज मल्टीनेशनल बैंकों से 5 साल की अवधि का लोन जुटा रही है। आमतौर पर टाटा की यह कंपनी पैसा जुटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड मार्केट का रुख करती है, लेकिन इस समय इंटरनेशनल बॉन्ड मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव चल रहा है, जिसके कारण वहां से पैसा उठाना बहुत महंगा सौदा साबित हो सकता था। यही वजह है कि कंपनी ने रणनीतिक रूप से बॉन्ड मार्केट से दूरी बनाकर सीधे बैंकों से लोन लेने का फैसला किया है। इस लोन की कीमत यूके बेंचमार्क स्टरलिंग ओवरनाइट इंडेक्स एवरेज (SONIA) के रेट से 155 बेसिस अंक ज्यादा रहने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि कंपनी को यह लोन करीब 5.28 फीसदी की ब्याज दर पर मिल सकता है।
टाटा ग्रुप की इस साख को सहारा देने के लिए दुनिया के पांच बड़े देशों के वित्तीय संस्थान आगे आए हैं। जेएलआर को यह भारी-भरकम लाइफलाइन देने वाले बैंकों में सिंगापुर का डीबीएस बैंक, अमेरिका का सिटीबैंक, यूके का स्टैंडर्ड चार्टर्ड, एचएसबीसी और जापान का एमयूएफजी बैंक शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक इन बैंकों ने फंड को कमिट भी कर दिया है, हालांकि इस संवेदनशील और बड़े सौदे पर गोपनीयता बनाए रखते हुए बैंकों के प्रवक्ताओं और खुद जेएलआर के आधिकारिक प्रतिनिधि ने फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है।
इस घटनाक्रम ने साल 2008 की उस ऐतिहासिक डील की यादें ताजा कर दी हैं, जब रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने 2.3 अरब डॉलर में फोर्ड से इस ब्रिटिश लग्जरी ब्रांड को खरीदकर पूरी दुनिया में भारतीय उद्योग का डंका बजाया था। सालों तक जेएलआर ने सफलता के नए कीर्तिमान रचे, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक आते-आते कंपनी पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 5.4 अरब पाउंड तक पहुंच गया है। इसमें 1.8 अरब पाउंड का अनसिक्योर्ड बॉन्ड्स और 2.9 अरब पाउंड का अनसिक्योर्ड लोन शामिल है। अब देखना यह होगा कि पांच अंतरराष्ट्रीय बैंकों से मिलने वाली यह 2 अरब पाउंड की भारी-भरकम वित्तीय संजीवनी, चीन की मंदी और साइबर अटैक के मलबे से जेएलआर को बाहर निकालकर क्या फिर से उसी पुरानी रफ्तार से दौड़ने में मददगार साबित हो पाती है या नहीं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
