ग्लोबल ब्रांड एप्पल और टाटा की साख दांव पर, मुख्यमंत्री थलपति विजय के सामने बड़ी औद्योगिक और पर्यावरणीय चुनौती|
होसुर में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के आईफोन पुर्जे बनाने वाले प्लांट पर भूजल प्रदूषित करने का आरोप, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दी तालाबंदी की चेतावनी।

होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री के मुख्य द्वार के सामने खड़े सुरक्षा और प्रशासनिक वाहन तथा बाईं ओर विचारमग्न मुद्रा में बैठे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय
तमिलनाडु में हाल ही में राजनीतिक बदलाव के बाद सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (थलपति विजय) की नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य में एक गंभीर औद्योगिक और पर्यावरणीय गतिरोध उत्पन्न हो गया है। होसुर में स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की आईफोन कंपोनेंट्स (पुर्जे) बनाने वाली विशाल विनिर्माण इकाई इस समय कड़े कानूनी और विनियामक संकटों से घिर गई है। राज्य के प्रदूषण नियामक द्वारा कंपनी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद इस प्लांट के संचालन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। यह मामला इसलिए संवेदनशील हो गया है क्योंकि इसका सीधा असर न केवल स्थानीय पर्यावरण पर पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र में कार्यरत हजारों श्रमिकों की आजीविका भी दांव पर लग गई है।
तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) द्वारा जारी आधिकारिक विनियामक नोटिस के अनुसार, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की इस फैक्ट्री से निकलने वाले रसायनिक अपशिष्ट जल के कारण आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों का भूजल (ग्राउंड वॉटर) अत्यधिक दूषित हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तत्काल और संतोषजनक स्पष्टीकरण के साथ सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो कानून के तहत फैक्ट्री को जबरन बंद करने की कार्रवाई की जा सकती है। यदि नियामक द्वारा बिजली काटने या तालाबंदी करने जैसा कोई कड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जाता है, तो इस प्लांट में कार्यरत लगभग 75,000 स्थानीय लोगों के रोजगार पर सीधे तौर पर संकट खड़ा हो जाएगा।
यह संपूर्ण विवाद होसुर प्लांट के आस-पास स्थित कृषि भूमि के मालिकों द्वारा पिछले कई महीनों से लगातार की जा रही शिकायतों के बाद गहराया है। किसानों का आरोप था कि फैक्ट्री का केमिकल युक्त गंदा पानी उनके खेतों और सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले खुले कुओं को पूरी तरह बर्बाद कर रहा है। इन गंभीर शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने दिसंबर 2025 से मई 2026 के मध्य पांच बार फैक्ट्री परिसर का औचक निरीक्षण किया। विनियामक जांच में सामने आया कि टाटा ने परिसर के भीतर बने रेनवाटर हार्वेस्टिंग पॉन्ड में दूषित पानी छोड़ दिया था, जो ओवरफ्लो होकर साथ लगते खेतों और खुले कुओं के भूजल में मिल गया। अधिकारियों का कहना है कि इस संदर्भ में पूर्व में भी निर्देश जारी किए गए थे, जिनका उचित अनुपालन नहीं किया गया।
दूसरी ओर, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से नोटिस प्राप्त होने के तुरंत बाद उन्होंने एक मान्यता प्राप्त और स्वतंत्र लैब के माध्यम से पूरे परिसर का वैज्ञानिक विश्लेषण कराया है। इस स्वतंत्र अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री के सभी संचालन विनियामक मानदंडों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इस जांच रिपोर्ट के साथ अपना विस्तृत और औपचारिक जवाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समय सीमा के भीतर सौंप दिया है।
यह विवाद मुख्यमंत्री थलपति विजय के प्रशासनिक कौशल की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। उनके सामने एक तरफ स्थानीय किसानों के अधिकारों, उपजाऊ भूमि और पर्यावरण की रक्षा करने का राजनीतिक दबाव है, तो दूसरी तरफ राज्य में औद्योगिक विकास, वैश्विक निवेश और हजारों युवाओं की नौकरियों को सुरक्षित रखने की एक महती जिम्मेदारी है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की यह इकाई दक्षिण एशिया में ताइवान की फॉक्सकॉन के बाद एप्पल की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर है। रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 तक वैश्विक स्तर पर बनने वाले कुल आईफोन्स में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 26 प्रतिशत होने का अनुमान है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी होसुर प्लांट से आता है। ऐसे में इस वैश्विक विनिर्माण इकाई पर किसी भी प्रकार का संकट पूरे देश की औद्योगिक छवि और एप्पल की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
