नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण आज भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत टूटने के बाद क्षेत्र में सीजफायर समाप्त होने और फिर से युद्ध छिड़ने की आशंका ने वैश्विक निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण घरेलू बाजार लाल निशान में गोते लगा रहे थे, लेकिन इस कोहराम के बीच देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने, टाटा ग्रुप के दो शेयरों ने अपनी चाल से सभी को अचंभित कर दिया। टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के शेयरों में 12 प्रतिशत तक की जबरदस्त तेजी देखी गई, जिसने बाजार के नकारात्मक रुझान को चुनौती दी।

इस अप्रत्याशित तेजी का मुख्य कारण टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' की संभावित लिस्टिंग और इसके आगामी आईपीओ (IPO) को लेकर चल रही गहन चर्चा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स बोर्ड के कुछ प्रभावशाली सदस्यों ने अब सार्वजनिक तौर पर टाटा संस की लिस्टिंग का समर्थन करना शुरू कर दिया है। टाटा ट्रस्ट्स, जिसकी टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत की निर्णायक हिस्सेदारी है, के भीतर इस मुद्दे पर चल रहा वैचारिक मंथन अब धरातल पर आता दिख रहा है। टाटा केमिकल्स का शेयर आज बाजार बंद होने तक 12 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ 774 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन का शेयर 8.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 722 रुपये के भाव पर बंद हुआ। उल्लेखनीय है कि इन दोनों ही कंपनियों की टाटा संस में महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है।

टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और देश के पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह ने टाटा संस की लिस्टिंग की वकालत करते हुए कहा है कि आईपीओ के जरिए कंपनी को सार्वजनिक करना एक सकारात्मक कदम हो सकता है। उनसे पहले टीवीएस ग्रुप के दिग्गज वेणु श्रीनिवासन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। इस चर्चा में एक और महत्वपूर्ण पक्ष शापूरजी पलोंजी (एसपी) ग्रुप का है, जिसकी टाटा संस में 18.3 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शापूरजी पलोंजी मिस्त्री ने सार्वजनिक लिस्टिंग का समर्थन करते हुए तर्क दिया है कि इससे कंपनी के गवर्नेंस मानकों में सुधार होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और पूरे टाटा ईकोसिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित होगी। उन्होंने उन चिंताओं को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि आईपीओ लाने से टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका या लाभार्थियों के हितों को कोई नुकसान पहुंचेगा।

कानूनी और नियामक पहलुओं को देखें तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियम इस पूरे मामले में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर लेयर' एनबीएफसी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है। केंद्रीय बैंक के संशोधित नियमों के अनुसार, इस श्रेणी की कंपनियों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। हालांकि, नोएल टाटा की अध्यक्षता में टाटा ट्रस्ट्स ने पहले एन. चंद्रशेखरन को लिस्टिंग से बचने के सभी विकल्पों को तलाशने का निर्देश दिया था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई से छूट मिलने की संभावना अत्यंत कम है। यदि आरबीआई अपने रुख पर कायम रहता है, तो टाटा संस के पास आईपीओ लाने के अलावा कोई विकल्प शेष नहीं बचेगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा संस की लिस्टिंग न केवल टाटा ग्रुप की कंपनियों के मूल्यांकन को बढ़ाएगी, बल्कि इससे एसपी ग्रुप को भी अपनी हिस्सेदारी को भुनाने और अपने कर्ज के बोझ को कम करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, टाटा ग्रुप का एक धड़ा अभी भी कंपनी को अनलिस्टेड प्राइवेट एंटिटी बनाए रखने के पक्ष में है, लेकिन बोर्ड के भीतर बदलती राय और नियामक दबाव ने टाटा ग्रुप की भविष्य की दिशा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम का प्रभाव आने वाले दिनों में न केवल टाटा ग्रुप के अन्य शेयरों पर, बल्कि समग्र शेयर बाजार की धारणा पर भी देखने को मिलेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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