ओडिशा: हीराकुंड जलाशय से सुजाता भुइयां ने केज फिश फार्मिंग के जरिए लिखी सफलता की नई इबारत

ओडिशा के संबलपुर जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने न केवल महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को नए आयाम दिए हैं, बल्कि आधुनिक कृषि के क्षेत्र में भी एक मिसाल कायम की है। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली सुजाता भुइयां आज एक सफल उद्यमी के रूप में उभरकर सामने आई हैं। उनके साहस और अटूट संकल्प का परिणाम है कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके प्रयासों की सराहना की है। सुजाता की यह यात्रा एक गृहिणी से एक सफल व्यवसायी बनने तक की है, जिसने हीराकुंड जलाशय के पानी में अपनी मेहनत से सफलता का संचार किया है।

सुजाता भुइयां की सफलता का सफर वर्ष 2023 में तब शुरू हुआ जब उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने और परिवार के सहयोग के लिए कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने पारंपरिक रास्तों को छोड़कर 'रिजर्वायर केज कल्चर' यानी पिंजरा मछली पालन की आधुनिक तकनीक को चुना। हीराकुंड जलाशय जैसे विशाल प्राकृतिक संसाधन को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। शुरुआत में उनके पास संसाधनों का अभाव था और तकनीकी चुनौतियों का पहाड़ सामने था, विशेषकर पानी की गुणवत्ता बनाए रखना और मछलियों के चारे का सटीक प्रबंधन करना। हालांकि, सुजाता ने इन बाधाओं को अपनी राह का पत्थर नहीं बनने दिया और वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया।

व्यवसाय को बड़े स्तर पर स्थापित करने के लिए वित्तीय निवेश एक बड़ी चुनौती थी। सुजाता के इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 54 लाख रुपये थी। इस कठिन परिस्थिति में सरकारी योजनाओं ने उनकी सहायता की, जहां उन्हें 32 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी प्राप्त हुई। वित्तीय सहायता मिलने के बाद सुजाता ने अपनी दक्षता बढ़ाने के लिए आईसीएआर-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण ने उन्हें स्टॉक चयन, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक मछली पालन की बारीकियों से अवगत कराया, जिससे उनके उद्यम को तकनीकी मजबूती मिली।

आज सुजाता का यह व्यवसाय पूरी तरह फल-फूल रहा है। मात्र दो से तीन वर्षों के भीतर उनका मछली उत्पादन सालाना 25 से 30 टन तक पहुंच गया है। इस उत्पादन से वह प्रति वर्ष 7 से 10 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं। उनकी इस उपलब्धि ने संबलपुर के अन्य ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोले हैं। सुजाता का मॉडल यह सिद्ध करता है कि यदि सही प्रशिक्षण और सरकारी नीतियों का लाभ उठाया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैश्विक स्तर के उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं।

उनकी इस असाधारण उपलब्धि का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में सुजाता भुइयां के संघर्ष और सफलता का विशेष उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें 'नारी शक्ति' और जमीनी स्तर पर आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। सुजाता की कहानी आज देश भर के युवाओं और महिलाओं को प्रेरित कर रही है कि वे बड़े सपने देखें और संसाधनों की कमी को अपनी प्रगति में बाधक न बनने दें। उनका यह सफर केवल व्यक्तिगत लाभ की कहानी नहीं है, बल्कि यह ओडिशा के मत्स्य पालन क्षेत्र में एक नई क्रांति का संकेत है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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