नई दिल्ली: भारतीय इक्विटी बाजार ने आज एक बार फिर अपनी आंतरिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं को दरकिनार कर दिया है। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी का रुख देखा गया, जो निवेशकों के बीच मजबूत आत्मविश्वास का संकेत है। आश्चर्यजनक रूप से यह बढ़त तब दर्ज की गई है जब रुपया अपने ऐतिहासिक निचले स्तरों की ओर अग्रसर है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं और अधिकांश एशियाई बाजारों में बिकवाली का माहौल बना हुआ है। इसके बावजूद, शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने भी 150 अंकों की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल की.

बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो सुबह 10 बजे तक सेंसेक्स 348.65 अंक यानी 0.46 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,747.37 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 102.70 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,792.30 अंक के स्तर को छू चुका था। इस तेजी का मुख्य नेतृत्व आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों ने किया, जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स में एक प्रतिशत से अधिक की मजबूती देखी गई। दिग्गज शेयरों में अडानी पोर्ट्स, इन्फोसिस, टीसीएस, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक और मारुति सुजुकी के शेयरों में जबरदस्त लिवाली दर्ज की गई। हालांकि, दूसरी ओर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई, एशियन पेंट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे बड़े शेयरों में 2 प्रतिशत तक की गिरावट ने बाजार की रफ्तार पर थोड़ा अंकुश लगाने का प्रयास किया, जिससे एनएसई पर 1,050 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 1,276 शेयरों में गिरावट का मिश्रित रुझान भी सामने आया.

मुद्रा बाजार की स्थिति बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिकी डॉलर की तुलना में रुपया आज शुरुआती सत्र में 29 पैसे टूटकर 95.93 के स्तर तक लुढ़क गया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौतीपूर्ण संकेत है। रुपये की इस कमजोरी के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें एक बड़ा कारण हैं। ब्रेंट क्रूड आज 1.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। आमतौर पर तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपये की गिरावट का शेयर बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की वापसी ने समीकरण बदल दिए हैं। गुरुवार को सात दिनों की लगातार बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक 'नेट बायर' रहे और उन्होंने 187 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिसने बाजार को गिरने से बचा लिया.

वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो एशियाई बाजारों में आज भारी अफरा-तफरी का माहौल रहा। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहा, जबकि जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंग सेंग भी एक प्रतिशत से ज्यादा टूटे। चीन का शंघाई कंपोजिट हालांकि मामूली बढ़त दिखाने में सफल रहा। इस विपरीत माहौल में भारतीय बाजार की बढ़त को गुरुवार को अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में आई तेजी से मिल रहे सकारात्मक संकेतों से जोड़ा जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि विदेशी निवेशकों की लिवाली जारी रहती है, तो भारतीय बाजार वैश्विक झटकों को सहने की अपनी क्षमता को और अधिक पुख्ता कर सकेगा। आज की यह तेजी न केवल वित्तीय मजबूती का प्रतीक है बल्कि भविष्य के ट्रेडों के लिए एक सकारात्मक आधार भी तैयार कर रही है.

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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