आरबीआई के बड़े फैसलों के बाद बाजार हुआ धड़ाम; सेंसेक्स-निफ्टी डूबे लाल निशान में
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने के फैसले के बाद घरेलू शेयर सूचकांकों में मुनाफावसूली दर्ज की गई।

मुंबई स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांकों में गिरावट आने के कारण घरेलू वित्तीय बाजार में निवेशकों ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख अपनाते हुए मुनाफावसूली की।
RBI MPC policy impact on share market : भारतीय वित्तीय बाजार में शुक्रवार का दिन उम्मीदों और निराशा के दोहरे भंवर के बीच समाप्त हुआ, जिसने निवेशकों को गहरी अनिश्चितता में डाल दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बेहद महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसलों और लगातार गहराते वैश्विक आर्थिक संकटों के बीच दलाल स्ट्रीट पर आज पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। निवेशकों द्वारा अत्यधिक सतर्क रुख अपनाने के कारण शुरुआती कारोबार में दिखी मामूली बढ़त देखते ही देखते स्वाहा हो गई और बाजार का पूरा सेंटिमेंट अचानक मंदी की चपेट में आ गया। केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों पर आई नीति के बाद भी घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक भारी बिकवाली के दबाव में आकर लाल निशान के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की हालिया तेजी पर ब्रेक लग गया है।
कारोबारी सत्र के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 अंक के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस चौतरफा गिरावट से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी अछूता नहीं रह सका और वह भी 49.85 अंक यानी 0.21 प्रतिशत फिसलकर 23,366.70 अंक पर बंद हुआ। बाजार के तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 23,450 से 23,550 का स्तर निकट अवधि में एक बेहद मजबूत और प्रमुख प्रतिरोध यानी रेजिस्टेंस बना हुआ है। जब तक निफ्टी इस मनोवैज्ञानिक दायरे के ऊपर मजबूती से टिकने में कामयाब नहीं होता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद बेमानी है, हालांकि इस स्तर के पार होने पर सूचकांक के 23,750 से 23,800 के स्तर तक जाने के रास्ते खुल सकते हैं।
इस गिरावट के पीछे आधिकारिक और नीतिगत मोर्चे पर हुए बड़े घटनाक्रमों का सीधा हाथ रहा। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का फैसला सुनाया। केंद्रीय बैंक ने दुनिया भर में बढ़ रही आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षा देने के इरादे से अपना तटस्थ यानी न्यूट्रल रुख बरकरार रखा है। हालांकि, बाजार की इस सुस्ती के बीच आरबीआई ने घरेलू वित्तीय बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह को गति देने के लिए कई बड़े विधिक व प्रशासनिक नीतिगत सुधारों की भी घोषणा की है। इन सरकारी कदमों के तहत अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया है, साथ ही फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के दायरे में आने वाली सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) की सूची का और अधिक विस्तार किया गया है।
इन तमाम प्रशासनिक घोषणाओं के बावजूद बाजार का आंतरिक ढांचा आज पूरी तरह से चरमरा गया, जिसके कारण व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट में भी भारी कमजोरी दर्ज की गई। मझोली और छोटी कंपनियों के सूचकांकों में निवेशकों ने तेजी से अपने हाथ पीछे खींचे, जिसके चलते निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.35 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.06 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। सेक्टोरल सूचकांकों के विश्लेषण से पता चलता है कि आज सबसे ज्यादा मार आईटी और मेटल (धातु) क्षेत्र के शेयरों पर पड़ी, जहां वैश्विक मांग में कमी की आशंका के चलते निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली की। निफ्टी के भीतर सबसे अधिक टूटने वाले दिग्गज शेयरों में हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, विप्रो और ट्रेंट लिमिटेड प्रमुख रूप से शामिल रहे, जिन्होंने पूरे सूचकांक को नीचे खींचने का काम किया, जबकि दूसरी ओर केवल मीडिया सेक्टर ने ही विपरीत परिस्थितियों में अपेक्षाकृत कुछ बेहतर प्रदर्शन करके बाजार को संभालने की मामूली कोशिश की।
इस पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष और दूरगामी प्रभाव यह है कि नीतिगत मोर्चे पर स्थिरता और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के तमाम विनियामक प्रयासों के बावजूद, बाजार वर्तमान में वैश्विक स्तर पर मंडरा रहे आर्थिक मंदी के बादलों से डरा हुआ है। केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती न करने और तटस्थ रुख अपनाने से यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में महंगाई और तरलता के मोर्चे पर चुनौतियां बनी रहने वाली हैं। शुक्रवार को बाजार का इस तरह लाल निशान में बंद होना यह संकेत देता है कि आने वाले हफ्तों में भी भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा और निवेशकों को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
