share market crash today sensex nifty falls : भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 के शुरुआती हफ्ते किसी डरावने सपने से कम साबित नहीं हो रहे हैं। गुरुवार, 8 जनवरी को दलाल स्ट्रीट पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब निवेशकों की भारी बिकवाली के चलते बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन सेंसेक्स ने करीब 780 अंकों की गोता लगाई, जिससे निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये पल भर में स्वाहा हो गए। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली गिरावट नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक निफ्टी में देखी गई, जो 26,000 के अपने सबसे महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़कर उसके नीचे बंद हुआ। इस गिरावट ने बाजार के गलियारों में अनिश्चितता और भय का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह महज एक सुधार है या किसी बड़ी मंदी की आहट।

बाजार में इस कोहराम की मुख्य वजह आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में मची भगदड़ रही। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर ने तकनीकी शेयरों की चमक फीकी कर दी है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों में बढ़ती अनिश्चितता ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को बैकफुट पर धकेल दिया है, जिससे भारतीय टेक कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव दिखा। सेक्टरवार विश्लेषण करें तो आईटी के साथ-साथ रियल्टी और मेटल शेयरों ने भी आज घुटने टेक दिए। यहाँ तक कि बैंकिंग और एफएमसीजी जैसे रक्षात्मक माने जाने वाले सेक्टर भी इस गिरावट की लहर से खुद को बचा नहीं पाए। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में आई कमजोरी ने यह साफ कर दिया कि बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह से नकारात्मक हो चुका है।

तकनीकी विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल वैश्विक कारण ही नहीं, बल्कि आगामी केंद्रीय बजट को लेकर निवेशकों की सतर्कता भी एक बड़ा कारक है। हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने घरेलू निवेशकों के भरोसे को डिगा दिया है। कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकासी ने आग में घी डालने का काम किया है। बाजार की इस चौड़ाई (Market Breadth) का नकारात्मक होना यह दर्शाता है कि हर बढ़ने वाले शेयर के मुकाबले गिरने वाले शेयरों की संख्या कहीं अधिक थी, जो एक कमजोर बाजार की स्पष्ट निशानी है।

आज की इस भारी गिरावट ने निवेशकों को पूरी तरह से अलर्ट मोड पर डाल दिया है। आने वाले कुछ कारोबारी सत्र भारतीय बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि निफ्टी का 26,000 के स्तर से नीचे गिरना तकनीकी रूप से बाजार को और कमजोर कर सकता है। अब सभी की निगाहें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के अगले कदम और वैश्विक बाजारों के रुख पर टिकी हैं। क्या भारतीय बाजार इस झटके से उबरकर वापस वापसी करेगा या बिकवाली का यह दबाव दलाल स्ट्रीट को और गहरे गर्त में ले जाएगा, यह आने वाले कुछ दिनों की गतिविधियों से स्पष्ट होगा। फिलहाल, निवेशकों के लिए 'रुको और देखो' की नीति अपनाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प नजर आ रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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