जब सब गिर रहे थे तब स्पाइसजेट ने भरी ऊंची उड़ान, क्या डूबती नैया को मिल गया है तिनके का सहारा?
शेयर बाजार में 1000 अंकों की गिरावट के बीच स्पाइसजेट के शेयरों में तेजी, 4 दिनों में दिया 21 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न।

स्पाइसजेट का विमान, जिसके शेयर ने आज बाजार की गिरावट के बावजूद अपर सर्किट छुआ।
शेयर बाजार की ऐतिहासिक गिरावट के बीच स्पाइसजेट के शेयरों का अप्रत्याशित उछाल: संकट में भी निवेशकों को मिला सहारा
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा, जहां अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने की खबरों ने निवेशकों के बीच भारी अफरा-तफरी पैदा कर दी। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही 1,000 अंकों से अधिक का गोता लगा गया। बाजार के इस चौतरफा कोहराम के बीच एक विमानन कंपनी के शेयर ने सभी को हैरान कर दिया। स्पाइसजेट लिमिटेड के शेयरों ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद न केवल मजबूती दिखाई, बल्कि कारोबारी सत्र के शुरुआती घंटों में ही अपर सर्किट को छू लिया। यह घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि कंपनी इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन वित्तीय दौर से गुजर रही है।
बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो स्पाइसजेट का शेयर पिछले शुक्रवार को 12.27 रुपये पर बंद हुआ था। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही इसमें पांच प्रतिशत की बढ़त देखी गई और यह 12.88 रुपये के अपर सर्किट पर जाकर स्थिर हो गया। गौर करने वाली बात यह है कि यह तेजी केवल एक दिन तक सीमित नहीं रही है; पिछले चार कारोबारी सत्रों में इस शेयर ने निवेशकों को 21 प्रतिशत से भी अधिक का शानदार रिटर्न दिया है। सात अप्रैल को यह शेयर महज 10.62 रुपये पर था, लेकिन देखते ही देखते इसने 12.88 रुपये का स्तर छू लिया। हालांकि, इस अचानक आई तेजी के पीछे के ठोस कारणों को लेकर बाजार विशेषज्ञ और निवेशक दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं।
कंपनी की आंतरिक स्थिति पर नजर डालें तो तस्वीर काफी चिंताजनक नजर आती है। स्पाइसजेट इस समय चौतरफा चुनौतियों का सामना कर रही है। एक ओर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे विमानन ईंधन (ATF) की लागत तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर, कंपनी ने हालिया दिसंबर तिमाही में 261 करोड़ रुपये के समेकित शुद्ध घाटे की रिपोर्ट पेश की है। वित्तीय संकट का आलम यह है कि पिछले छह महीनों में इस शेयर की कीमत में 62 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और एक साल का आंकड़ा देखें तो यह करीब 73 प्रतिशत तक फिसल चुका है। ऐसे में वर्तमान तेजी को लंबे समय से घाटा झेल रहे निवेशकों के लिए एक छोटी सी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
कानूनी मोर्चे पर भी कंपनी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में यूनाइटेड किंगडम की एक अदालत ने स्पाइसजेट को विमान रखरखाव और पट्टे पर देने वाली एक कंपनी को लगभग 8 मिलियन डॉलर (करीब 70 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का कड़ा आदेश दिया है। यह बकाया राशि जनवरी 2022 से लीज किराये और नवंबर 2020 से लंबित रखरखाव खर्चों से संबंधित है। कानूनी दबाव और बढ़ते कर्ज के बीच शेयर में आई इस तेजी को लेकर बाजार विश्लेषकों ने चेतावनी भी जारी की है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक 'सट्टेबाजी से प्रेरित मूव' हो सकता है, जिसका कोई मजबूत बुनियादी आधार नहीं है। कंपनी की गंभीर वित्तीय स्थिति को देखते हुए किसी भी समय बड़ी गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष के तौर पर, स्पाइसजेट के शेयरों में आई यह तेजी बाजार की सामान्य चाल के बिल्कुल विपरीत है। जहां एक ओर पूरा विमानन क्षेत्र ईंधन की बढ़ती कीमतों और वैश्विक युद्ध की आहट से सहमा हुआ है, वहीं स्पाइसजेट का अपर सर्किट में फंसना एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे कंपनी की बैलेंस शीट, बकाया कानूनी देनदारियों और वैश्विक अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लें। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्पाइसजेट अपनी इस उड़ान को बरकरार रख पाती है या यह तेजी केवल एक क्षणिक बुलबुला साबित होती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
