भारत में SIP निवेश में 10 गुना हुई वृद्धि; ग्रो इंडिया इन्वेस्टर फेस्टिवल
पिछले एक दशक में भारत का म्यूचुअल फंड एयूएम 80 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा, जिसमें छोटे शहरों और महिला निवेशकों की अहम भागीदारी रही।

भारत में म्यूचुअल फंड और एसआईपी के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता एक सांकेतिक चित्र
Groww India Investor Festival 2026 : भारत के वित्तीय परिदृश्य में एक ऐसी खामोश लेकिन बेहद ताकतवर क्रांति आकार ले रही है, जिसने निवेश के पारंपरिक ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। कभी केवल महानगरों और उच्च मध्यम वर्ग तक सिमटा रहने वाला शेयर बाजार अब भारत के गांव-कस्बों की दहलीज तक जा पहुंचा है। इस अभूतपूर्व बदलाव की तस्दीक देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित ‘ग्रो इंडिया इन्वेस्टर फेस्टिवल 2026’ के मंच से हुई। ग्रो (Groww) के 10वें स्थापना दिवस के अवसर पर कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक ललित केशरे ने भारतीय निवेशकों की बदलती मानसिकता और बाजार के विस्तार पर जो आंकड़े पेश किए, वे देश की आर्थिक परिपक्वता का जीवंत प्रमाण हैं।
इस भव्य आयोजन के दौरान ललित केशरे ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में भारत के खुदरा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र (Retail Investment Ecosystem) में कायाकल्प हो चुका है। उन्होंने बताया कि साल 2016 में म्यूचुअल फंड का कुल प्रबंधन (AUM) महज 12 लाख करोड़ रुपए के आसपास था, जो आज अविश्वसनीय रूप से छलांग लगाकर 80 लाख करोड़ रुपए के पार जा पहुंचा है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली वृद्धि मासिक एसआईपी (SIP) निवेश में देखी गई है, जो एक दशक पहले के 3,000 करोड़ रुपए के स्तर से अब 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ चुका है। यह स्पष्ट करता है कि भारतीय अब न केवल बचत कर रहे हैं, बल्कि भविष्य के लिए धन निर्माण (Wealth Creation) को अपनी प्राथमिकता बना चुके हैं।
इस निवेश क्रांति की सबसे खास बात इसकी समावेशिता है। केशरे के अनुसार, निवेश अब मुंबई और बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहरों की जागीर नहीं रह गया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों के छोटे शहरों से आ रही निवेशकों की बाढ़ यह दर्शाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और वित्तीय जागरूकता ने भौगोलिक दूरियों को मिटा दिया है। विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी में आया उछाल भारतीय समाज के बदलते वित्तीय व्यवहार का संकेत है; वर्तमान में बाजार में कदम रखने वाले हर चार नए निवेशकों में से एक महिला है। यह न केवल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को दर्शाता है, बल्कि घरेलू वित्तीय निर्णयों में उनकी बढ़ती भूमिका को भी पुख्ता करता है।
भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए ग्रो के सीईओ ने स्पष्ट किया कि भारत में आने वाले समय में सबसे बड़ा मूल्य निर्माण (Value Creation) डीप-टेक सेक्टर के माध्यम से होगा। टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति के नए इंजन बनेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि निवेश अब महज एक विकल्प नहीं, बल्कि आम भारतीय परिवारों की वित्तीय योजना का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। अंततः, यह बदलाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि एक नए भारत की तस्वीर है जो जोखिम उठाने और भविष्य को तकनीकी व वित्तीय रूप से सुरक्षित करने का हौसला रखता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
